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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court said: Accused cannot be held guilty on the basis of his absconding, life sentence canceled

हाईकोर्ट ने कहा : आरोपी के फरार होने के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहरा सकते, आजीवन कारावास की सजा रद्द

Fri, 21 Jun 2024 05:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 21 Jun 2024 05:55 PM IST
सार

आगरा के डौकी थाना में राजवीर सिंह पर पांच अगस्त 1999 में अपने सगे भाई नेम सिंह की हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने पहले अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया था। बाद में संदेह के आधार पर राजवीर को आरोपी बनाया।

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High Court said: Accused cannot be held guilty on the basis of his absconding, life sentence canceled
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 साल पुराने हत्या के मामले में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा से बरी कर दिया। कहा कि केवल आरोपी के फरार होने के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और जस्टिस शिव शंकर प्रसाद की पीठ ने आगरा के राजवीर सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए की।

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आगरा के डौकी थाना में राजवीर सिंह पर पांच अगस्त 1999 में अपने सगे भाई नेम सिंह की हत्या के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने पहले अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया था। बाद में संदेह के आधार पर राजवीर को आरोपी बनाया। 16 अगस्त, 1999 को अपीलकर्ता को गिरफ्तार किया गया और उसका बयान दर्ज किया गया। उसकी निशानदेही पर एक कुल्हाड़ी, उसके कमरे से खून से सना हुआ पायजामा और शर्ट भी बरामद किया गया। ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। आदेश से व्यथित होकर हाईकोर्ट में अपील दायर की गई है।
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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी के घर से कुल्हाड़ी और कपड़ों की कथित बरामदगी भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत साबित नहीं हुआ है। उसे बरी किया जाना चाहिए। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि अपीलकर्ता घटनास्थल से फरार हो गया था, जो इस मामले में उसकी संलिप्तता का संकेत है।
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कोर्ट ने कहा कि केवल आरोपी के फरार होने के आधार पर उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। शासकीय अधिवक्ता का तर्क महत्वहीन है। कोर्ट ने कहा अभियोजन पक्ष अपीलकर्ता के खिलाफ अपना मामला साबित करने में विफल रहा है। याची संदेह का लाभ पाने का हकदार है। ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए अपील स्वीकार कर आरोपी को बरी कर दिया।

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