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UP : हाईकोर्ट का अहम फैसला- प्रोन्नत अधिकारियों का वेतन उनके जूनियरों से कम नहीं होना चाहिए

Wed, 14 Jan 2026 06:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 14 Jan 2026 06:58 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीसीएस से आईएएस में प्रोन्नत अधिकारी बादल चटर्जी को बड़ी राहत देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को उनके बकाया वेतन का भुगतान ब्याज सहित करने का आदेश दिया है।

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High Court's important decision - Salary of promoted officers should not be less than that of their juniors
court room - फोटो : ANI

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीसीएस से आईएएस में प्रोन्नत अधिकारी बादल चटर्जी को बड़ी राहत देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को उनके बकाया वेतन का भुगतान ब्याज सहित करने का आदेश दिया है। कहा है कि प्रोबेशन अवधि के दौरान भी पीसीएस से आईएएस में प्रोन्नत अधिकारियों को अपने उन जूनियर अधिकारियों से कम वेतन नहीं दिया जा सकता, जो राज्य सिविल सेवा में ही बने रहे हों।

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यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने दिया है। प्रयागराज निवासी बादल चटर्जी और शंकर सिंह 1979 बैच के पीसीएस अधिकारी थे। वर्ष 2012 में आईएएस कैडर में उन्हें प्रोन्नति दी गई थी। आईएएस में प्रोबेशन के दौरान उन्होंने अपनी मूल सेवा पीसीएस पर ग्रहणाधिकार बनाए रखा। इसी दौरान जून 2013 में पीसीएस में ही रह गए उनके जूनियरों को 67,000–79,000 रुपये का उच्च वेतनमान दे दिया गया पर बादल चटर्जी को यह लाभ नहीं मिला। इस फैसले को उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में चुनौती दी पर राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने कैट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने भारत सरकार के 31 अक्तूबर 1966 के निर्णय और 1994 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि प्रोन्नत अधिकारी का वेतन किसी भी स्थिति में उससे कनिष्ठ अधिकारी से कम नहीं हो सकता। कोर्ट ने अधिकारियों के वर्षों तक वेतन वृद्धि टालने को ‘लालफीताशाही’ करार देते हुए नाराजगी जताई। साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया है कि 20 जून 2013 से वेतन अंतर का बकाया, संशोधित सेवानिवृत्ति लाभ और पेंशन का भुगतान किया जाए। बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी दिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया दो माह के भीतर पूरी की जाए।

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