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UP:हाईकोर्ट ने कब्रिस्तान भूमि के सर्वे पर रोक लगाने से किया इन्कार, कहा-राजस्व टीम के सामने दर्ज कराएं आपत्ति

Wed, 31 Dec 2025 08:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 31 Dec 2025 08:51 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले के कोट (अंदर चुंगी) गांव स्थित गाटा संख्या 32/2 की पैमाइश और सर्वेक्षण कार्यवाही पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है।

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High Court refuses to stay survey of graveyard land, says objections should be filed with revenue team
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले के कोट (अंदर चुंगी) गांव स्थित गाटा संख्या 32/2 की पैमाइश और सर्वेक्षण कार्यवाही पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे राजस्व टीम के समक्ष उपस्थित होकर पैमाइश की कार्यवाही के दौरान अपनी बात रख सकते हैं। साथ ही याचिका निस्तारित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा व न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने दिया है।

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असीम खान और 16 अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर संभल एसडीएम के दिसंबर-2025 में जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें गाटा संख्या 32/2 के सर्वेक्षण और सीमांकन का निर्देश दिया था। याचियों का कहना था कि यह भूमि ‘कब्रिस्तान’ के रूप में दर्ज है। यहां किसी भी प्रकार की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेश का उल्लंघन है। मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि विवादित भूमि सरकारी अभिलेखों में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। राज्य की ओर से केवल भूमि की पैमाइश और सीमांकन का कार्य किया जा रहा है। इससे याचियों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।
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याची अधिवक्ता ने दलील दी कि एक सड़क बनाकर कब्रिस्तान का अवैध रूप से बंटवारा किया गया है। यह पैमाइश केवल एक विशेष समुदाय के लोगों को वहां से बेदखल करने के उद्देश्य से की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि विवादित आदेश केवल भूमि के मापन और सीमांकन के लिए है। कोर्ट ने निर्देशों के साथ याचिका अंतिम रूप से निस्तारित कर दी। 

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