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फैसला: शराब की ऑनलाइन बिक्री का आदेश देने से हाईकोर्ट का इनकार, कहा- यह राज्य सरकार का नीतिगत मामला
Wed, 11 Aug 2021 07:43 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 11 Aug 2021 07:43 PM IST
सार
शराब की होम डिलीवरी का आदेश देने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता का कहना था कि सरकार ऑनलाइन बिक्री नहीं चाहती। यह सरकार का नीतिगत निर्णय है।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शराब की ऑन लाइन बिक्री से होम डिलीवरी की अनुमति की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका खारिज कर दी है और कहा है कि यह राज्य सरकार का नीतिगत मामला है, फिलहाल शराब की ऑनलाइन बिक्री की अनुमति नहीं दी जा सकती।
पेशे से अधिवक्ता याची का कहना था कि ऐसा करने से राजस्व में बढ़ोतरी होगी और सीनियर सिटिजन व ऐसे लोगों को सुविधा होगी जो दुकान पर जाकर शराब खरीदने में झिझकते हैं। कोर्ट ने कहा कि याची ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इतर कारणों से ऑनलाइन बिक्री की मांग की है।
यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एस सी शर्मा की खंडपीठ ने अधिवक्ता गोपाल कृष्ण पांडेय की याचिका पर दिया है। याची का यह भी कहना था कि कम खर्च में दुकान चलाई जा सकेगी। दुकान पर अनावश्यक भीड़ न होने से कानून व्यवस्था में भी सुधार होगा।
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राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता का कहना था कि सरकार ऑनलाइन बिक्री नहीं चाहती। यह सरकार का नीतिगत निर्णय है। कुछ राज्यों में कोरोना पीक पर था तो ऑनलाइन शराब बेचने की अनुमति दी गई। यूपी में कोविड की दूसरी लहर भी जा चुकी है। याचिका खारिज की जाए।
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पेशे से अधिवक्ता याची का कहना था कि ऐसा करने से राजस्व में बढ़ोतरी होगी और सीनियर सिटिजन व ऐसे लोगों को सुविधा होगी जो दुकान पर जाकर शराब खरीदने में झिझकते हैं। कोर्ट ने कहा कि याची ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इतर कारणों से ऑनलाइन बिक्री की मांग की है।
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यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम एन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एस सी शर्मा की खंडपीठ ने अधिवक्ता गोपाल कृष्ण पांडेय की याचिका पर दिया है। याची का यह भी कहना था कि कम खर्च में दुकान चलाई जा सकेगी। दुकान पर अनावश्यक भीड़ न होने से कानून व्यवस्था में भी सुधार होगा।
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राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता का कहना था कि सरकार ऑनलाइन बिक्री नहीं चाहती। यह सरकार का नीतिगत निर्णय है। कुछ राज्यों में कोरोना पीक पर था तो ऑनलाइन शराब बेचने की अनुमति दी गई। यूपी में कोविड की दूसरी लहर भी जा चुकी है। याचिका खारिज की जाए।