हाईकोर्ट ने उठाया सवाल : एक ही साक्ष्य को एक आरोप में अविश्वसनीय मानना तो दूसरे में स्वीकार करना उचित नहीं है
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 17 Oct 2026 03:33 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 42 साल पुराने आपराधिक मामले में बांदा निवासी बलराम को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने कहा कि एक ही साक्ष्य को एक आरोप में अविश्वसनीय मानना तो दूसरे में स्वीकार करना उचित नहीं है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।