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High Court : ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती
Sat, 06 Jun 2026 06:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 06 Jun 2026 06:12 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर ग्राम प्रधानों को छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त करने के उत्तर प्रदेश सरकार के 25 मई के अध्यादेश को चुनौती दी गई है।
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पंचायत चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर ग्राम प्रधानों को छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त करने के उत्तर प्रदेश सरकार के 25 मई के अध्यादेश को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि इस व्यवस्था के कारण ग्राम पंचायत चुनावों को टाला जा रहा है, जो संविधान की भावना के विपरीत है।
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न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्र युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की।
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सुनवाई के दौरान यह तकनीकी आपत्ति उठाई गई कि याचिका में जिस कानूनी प्रावधान के तहत अध्यादेश को जारी किया किया है, उसे चुनौती नहीं दी गई है। इस पर याचियों ने संशोधन के लिए समय मांगा। अदालत ने उन्हें एक सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई 22 जून को निर्धारित की है।
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याचियों ने कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई के तहत पंचायतों में समयबद्ध और नियमित चुनाव अनिवार्य हैं। उनका कहना है कि सरकार ने चुनाव टालने के लिए अपरिहार्य परिस्थितियों और जनहित जैसे अस्पष्ट आधारों का सहारा लिया है। याचिका में ग्राम पंचायतों की लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया की शीघ्र बहाली की भी मांग की गई है।