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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court orders DGP to conduct an inquiry after failure to register an FIR in a digital harassment case.

High Court : डिजिटल दुष्कर्म मामले में एफआईआर न करने पर हाईकोर्ट ने डीजीपी को जांच का दिया आदेश

Wed, 12 Aug 2026 07:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 12 Aug 2026 07:00 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के वेव सिटी थाना क्षेत्र में महिला कर्मचारी की ओर से लगाए गए डिजिटल दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोपों के मामले में एफआईआर दर्ज न करने को गंभीरता से लिया है।

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High Court orders DGP to conduct an inquiry after failure to register an FIR in a digital harassment case.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के वेव सिटी थाना क्षेत्र में महिला कर्मचारी की ओर से लगाए गए डिजिटल दुष्कर्म, यौन उत्पीड़न और धमकी के आरोपों के मामले में एफआईआर दर्ज न करने को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने डीजीपी को संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और चार सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह व न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने अर्पित गुप्ता की याचिका पर दिया है। याची के खिलाफ एक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई है। महिला ने आरोप लगाया है कि याची ने नौकरी में पदोन्नति और अन्य लाभ का लालच देकर यौन उत्पीड़न किया है। उसने मार्च 2026 की एक घटना में कथित डिजिटल दुष्कर्म का आरोप भी लगाया।
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महिला के अनुसार उसने पहले वेव सिटी थाने में व उच्च अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन एफआईआर नहीं हुई। इसके बाद मजिस्ट्रेट के आदेश पर 28 जुलाई को वेव सिटी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोपी याची ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने और प्राथमिकी को रद्द करने की मांग में याचिका दायर की है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराधों का खुलासा करते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करनी चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला के पास व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग या सोशल मीडिया बातचीत उपलब्ध नहीं होने को एफआईआर दर्ज न करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। सीडीआर, लोकेशन रिकॉर्ड, सीसीटीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जांच के दौरान जुटाए जा सकते हैं।


कोर्ट ने डीजीपी को जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि वेव सिटी थाने में शिकायत के बावजूद एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई और सात जुलाई की शिकायत पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। जांच में अधिकारियों की भूमिका भी देखी जाएगी। संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, कोर्ट ने आरोपी की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।

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