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High Court : आपराधिक मामले में फंसे छात्र को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता, सीबीएसई को प्रवेश देने का आदेश
Thu, 05 Feb 2026 06:42 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 05 Feb 2026 06:42 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले में फंसे छात्र को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। एक छात्र को शिक्षित करना और उसका शिक्षित होना विभाग या बोर्ड की तकनीकी आपत्तियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले में फंसे छात्र को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। एक छात्र को शिक्षित करना और उसका शिक्षित होना विभाग या बोर्ड की तकनीकी आपत्तियों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। अदालत ने बुलंदशहर के एक छात्र के मामले में हस्तक्षेप करते हुए सीबीएसई और संबंधित स्कूल को उसे कक्षा 11 में तत्काल प्रवेश देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने सीबीएसई की याचिका पर दिया है।
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बुलंदशहर निवासी छात्र कक्षा 10 की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका है और वह एक आपराधिक मामले में आरोपी है। इसके चलते दिल्ली पब्लिक स्कूल (यमुनापुरम) ने कक्षा 11 में प्रवेश देने से इन्कार कर दिया। मामला पहले किशोर न्याय बोर्ड और फिर बुलंदशहर की पॉक्सो कोर्ट पहुँचा, जहां दोनों ने ही छात्र के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्कूल को प्रवेश देने का निर्देश दिया।
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इस आदेश को सीबीएसई ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सीबीएसई के वकील ने दलील दी कि इस पूरी न्यायिक प्रक्रिया में उन्हें पक्षकार नहीं बनाया गया था, जबकि प्रवेश की प्रक्रिया सीधे उनके नियमों से जुड़ी हुई है।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद सीबीएसई के तर्कों को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने छात्र के शैक्षणिक सत्र को ध्यान में रखते हुए स्कूल को निर्देश दिया गया है कि वह 4 से 7 दिनों के भीतर छात्र को कक्षा 11 में अस्थायी प्रवेश प्रदान करे। छात्र को नियमित कक्षाओं में बैठने और स्कूल की ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं में सम्मिलित होने की पूरी अनुमति होगी। छात्र को जारी होने वाली मार्कशीट में यह स्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा कि उसका प्रवेश अस्थायी है और यह वर्तमान रिट याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगा।