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High Court Order : बड़ी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति तो छोटी को दें पारिवारिक पेंशन का लाभ

Fri, 16 May 2025 02:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 16 May 2025 02:50 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिता की मृत्यु के बाद पेंशन पा रही बेटी की नौकरी लगने पर तलाकशुदा मां के साथ रह रही उसकी छोटी बहन को पारिवारिक पेंशन देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने स्वाति की याचिका पर दिया।

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High Court Order: If elder daughter is given compassionate appointment, then younger one should be given
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिता की मृत्यु के बाद पेंशन पा रही बेटी की नौकरी लगने पर तलाकशुदा मां के साथ रह रही उसकी छोटी बहन को पारिवारिक पेंशन देने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने स्वाति की याचिका पर दिया।

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मेरठ के ईशापुरम मवाना रोड निवासी याची स्वाति के पिता गोपाल कृष्ण जिला निर्वाचन कार्यालय में चपरासी के पद पर कार्यरत थे। 15 मार्च 2011 को उनकी मृत्यु हो गई। याची के पिता व मां अनीता का 16 मई 2001 को तलाक हो गया था। पिता के साथ रह रही याची की बड़ी बहन चारु को पारिवारिक पेंशन मिलने लगी। वहीं, याची स्वाति और उसका छोटा भाई राहुल मां अनीता के साथ रह रहे थे। वर्ष 2013 में चारु को जिला निर्वाचन अधिकारी मेरठ में पिता की जगह पर कनिष्ठ लिपिक पद पर अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई। इसके बाद चारु की पारिवारिक पेंशन बंद हो गई।

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याची ने पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया। उसका कहना था कि वह अभी अविवाहित है। छोटे भाई की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वह पेंशन की हकदार है। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि किसी दिवंगत कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन उनके बड़े पुत्र या पुत्री को दी गई हो, और उसके बाद पारिवारिक आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति दे दी जाए, तो ऐसी स्थिति में अन्य आश्रितों के अधिकार समाप्त नहीं हो जाते।

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उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 16 मई 2015 के शासनादेश के अनुसार, अविवाहित बेटियां आश्रित की श्रेणी में पारिवारिक पेंशन की हकदार हैं। कोर्ट ने 16 मई 2015 के शासनादेश को ध्यान में रखते हुए निर्देश दिया कि याची के दावों की जांच कर नियमानुसार पारिवारिक पेंशन जारी किया जाए।

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