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हाईकोर्ट का आदेश : अतिक्रमण को लेकर सोरांव के राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच करें डीएम

Sun, 22 Sep 2024 01:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 22 Sep 2024 01:02 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की अदालत ने याची सुनील कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिवक्ता विभु राय को सुनकर दिया है। याची के अधिवक्ता की दलील थी कि एसडीएम सोरांव ने 2 मई 2024, 6 जुलाई 2024 और 27 जुलाई 2024 को पारित आदेशों में माधोपुर गांव में ग्रामसभा की जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माण को रोकने का निर्देश दिया था।

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High Court order: DM should investigate the role of Soraon's revenue officers regarding encroachment.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को सोरांव के माधोपुर ग्राम सभा की जमीन पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर सोरांव के तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की भूमिका की जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने जांच रिपोर्ट एक माह में अदालत में पेश करने को कहा है। साथ ही अगले आदेश तक विवादित स्थल पर किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की अदालत ने याची सुनील कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अधिवक्ता विभु राय को सुनकर दिया है। याची के अधिवक्ता की दलील थी कि एसडीएम सोरांव ने 2 मई 2024, 6 जुलाई 2024 और 27 जुलाई 2024 को पारित आदेशों में माधोपुर गांव में ग्रामसभा की जमीन पर किए जा रहे अवैध निर्माण को रोकने का निर्देश दिया था।
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इस आदेश के बावजूद तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक आदि ने कोई कार्रवाई नहीं की तथा अवैध निर्माण होने दिया। कोर्ट ने कहा कि एसडीएम का आदेश देखने से स्पष्ट है कि एसडीएम ने राजस्व अधिकारियों को अतिक्रमण रोकने के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। यह भी कहा था कि आवश्यकता होने पर पुलिस की भी सहायता ली जाए।
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आदेश की जानकारी होने के बावजूद राजस्व अधिकारियों ने अतिक्रमण होने दिया और कोई कार्रवाई नहीं की। स्पष्ट है कि अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसा किया। कोर्ट ने जिलाधिकारी प्रयागराज को निर्देश दिया है कि वह तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की भूमिका की जांच कर एक माह में कोर्ट में रिपोर्ट दें।


स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है। राजस्व अधिनियम की धारा 67 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि धारा 67 के तहत दर्ज मुकदमे पर रोक नहीं लगाई जा रही है। उसका निस्तारण नियमानुसार किया जाए।

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