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हाईकोर्ट का आदेश : गन्ना निरीक्षकों को अधिक वेतन भुगतान की वसूली पर रोक
Wed, 10 Nov 2021 09:04 PM IST
विनोद सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 10 Nov 2021 09:04 PM IST
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allahabad high court
- फोटो : social media
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गन्ना विभाग में कार्यरत गन्ना निरीक्षकों को गलत वेतन निर्धारण के कारण किए गए अधिक भुगतान की वसूली पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। महिपाल सिंह व अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने दिया। याचीगण के अधिवक्ता दिनेश राय का कहना था कि याची गण की नियुक्ति स्टैटिक प्रोजेक्ट में गन्ना विकास निरीक्षक के पद पर की गई थी।
बाद में इनको गन्ना विकास विभाग में समायोजित कर लिया गया। कहा गया कि पूर्व में की गई सेवा भी वर्तमान सेवा में जोड़ी जाएगी। उनको पुनरीक्षित वेतनमान अप्रैल 2001 से दिया जा रहा है। 25 मई 2017 को गन्ना आयुक्त ने याचीगण को 24 वर्ष की सेवा पूरी होने पर द्वितीय प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत किया।
मगर 5 अप्रैल 2021 को अपने ही आदेश को गन्ना आयुक्त ने रद्द कर दिया और अब अधिक भुगतान किए गए वेतन की वसूली की जा रही है। कहा गया कि वेतन निर्धारण में याचीगण की कोई भूमिका नहीं है। यह विभाग द्वारा ही किया गया है। इसलिए उनसे वसूली किया जाना गलत है। कोर्ट ने वसूली प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
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बाद में इनको गन्ना विकास विभाग में समायोजित कर लिया गया। कहा गया कि पूर्व में की गई सेवा भी वर्तमान सेवा में जोड़ी जाएगी। उनको पुनरीक्षित वेतनमान अप्रैल 2001 से दिया जा रहा है। 25 मई 2017 को गन्ना आयुक्त ने याचीगण को 24 वर्ष की सेवा पूरी होने पर द्वितीय प्रोन्नत वेतनमान स्वीकृत किया।
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मगर 5 अप्रैल 2021 को अपने ही आदेश को गन्ना आयुक्त ने रद्द कर दिया और अब अधिक भुगतान किए गए वेतन की वसूली की जा रही है। कहा गया कि वेतन निर्धारण में याचीगण की कोई भूमिका नहीं है। यह विभाग द्वारा ही किया गया है। इसलिए उनसे वसूली किया जाना गलत है। कोर्ट ने वसूली प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
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