कोरोना आपदा के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन देने का हाईकोर्ट अधिकारियों, शिक्षकों ने लिया निर्णय
कोरोना वायरस के प्रकोप से निपटने के लिए हाईकोर्ट, एनसीआर सहित अनेक संगठनों की ओर से प्रधानमंत्री राहत कोष में एक दिन का वेतन दिए जाने की घोषणा की गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट सहित इसके अधीन प्रदेश की सभी अदालतों के कर्मचारयों, अधिकारियों के एक दिन के बेसिक वेतन की कटौती की जाएगी।
मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर ने इसका अनुमोदन कर दिया है। महानिबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव की ओर से सभी जिला जजों व विशेष कार्याधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अप्रैल में मिलने वाले मार्च माह के वेतन से कटौती सुनिश्चित करते हुए इसका कड़ाई से पालन कर हाईकोर्ट को सूचित किया जाए। ऐसा ही निर्देश कामर्शियल कोर्ट, वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण, भूमि अधिग्रहण व पुनर्वास अधिकरण के पीठासीन अधिकारियों को भी दिया गया है।
उत्तर मध्य रेलवे के अफसरों एवं कर्मचारियों ने भी कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ाई के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष में 7.30 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। यह रकम एनसीआर के प्रयागराज, झांसी एवं आगरा मंडल में कार्यरत 60 हजार कर्मचारियों के एक दिन के वेतन से ली जाएगी। शनिवार को एनसीआर के जीएम राजीव चौधरी ने यह घोषणा की।
झूंसी स्थित गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर बद्रीनारायण के मुताबिक कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए यूजीसी के निर्देश पर संस्थान के निदेशक समेत सभी शिक्षक और कर्मचारी अपनी एक दिन की तनख्वाह प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराएंगे। इसी क्रम में शिक्षक भी आगे आए हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, विधायक सुरेश त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को एक दिन का वेतन देने की घोषणा की है।