फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   high court news5

नोएडा में सबकुछ ठीक नहीं: हाईकोर्ट

Tue, 20 Sep 2016 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद Updated Tue, 20 Sep 2016 01:36 AM IST
विज्ञापन
 नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के सीईओ रमारमण को नोएडा से स्थानांतरित करने के बाद हाईकोर्ट ने उनकी तैनाती के खिलाफ दाखिल याचिका निस्तारित कर दी है। मगर कोर्ट ने इस पूरे मामले पर सरकार के रवैये और तीनों अथॉरिटी में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तीखी टिप्पणी भी की है। अदालत ने कहा कि आईएएस अधिकारी रमारमण पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का कोई सीधा आरोप नहीं है, मगर उनके कार्यकाल में यादव सिंह जैसे कई बडे़-बड़े घोटाले हुए और भ्रष्टाचार के मामले खुले हैं। इन हालात में अथॉरिटी में अधिकारियों की तैनाती पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। एक ही अधिकारी को लंबे समय तक तैनात रखना व्यवस्था के प्रति संदेह पैदा करता है। अथॉरिटी को लेकर जिस प्रकार के आरोप सामने हैं उससे जाहिर है नोएडा में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।  
विज्ञापन


अखिल भारतीय मानव कल्याण एवं समाजोत्थान संस्था की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति दिलीप बी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने कहा कि सिविल सर्विसेज बोर्ड को आईएएस अधिकारियों की तैनाती की अधिकतम सीमा पर पुनर्विचार करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे आरोपों से बचा जा सके। 24 दिसंबर 2011 के शासनादेश में भी सिविल सर्विसेज बोर्ड को अधिकतम और न्यूनतम तैनाती की अवधि तय करनी है। बोर्ड ने न्यूनतम तैनाती अवधि तो तय कर ली है मगर अधिकतम समय सीमा अब तक तय नहीं है।
विज्ञापन


पीठ ने कहा कि 1955 की नियमावली में अधिकतम कार्यकाल का अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि एक ही अधिकारी किसी विशेष पद पर कई वर्षों तक तैनात रखा जा सकता है। तथ्यों को सही रखने और मौजूदा मामलों से बचने के लिए अधिकारियों के तबादले निश्चित समयावधि में होने चाहिए। नोएडा के लिए रमारमण का कोई विकल्प नहीं होने की सरकार की दलील को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसका विकल्प न हो। सरकार को इस तर्क के साथ नहीं आना चाहिए था कि रमारमण का विकल्प नहीं है क्योंकि प्रदेश में कोई दूसरा आईएएस अधिकारी इस पद के योग्य नहीं है। इससे तो अधिकारियों के स्थानांतरण का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। याचिका में लगाए गए आरोपों पर पीठ ने कहा कि धन के दुरुपयोग और जमीन के आवंटन में घोटालों को लेकर लगाए आरोप सामान्य प्रकृति के हैं। रमारमण पर व्यक्तिगत रूप से न तो कोई आरोप लगाया गया है और न ही ऐसी कोई बात उनके खिलाफ साबित हो रही है। याचिका में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे रमारमण के किसी घोटाले में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने का पता चलता हो। मगर यादव सिंह और अन्य पर लगे आरोप यदि सही हैं तो सब उनकी निगरानी में हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed