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High Court : समान इरादे के बिना केवल घटनास्थल पर उपस्थिति हत्या का आधार नहीं

Thu, 14 May 2026 07:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 14 May 2026 07:25 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समान इरादे के बिना केवल घटनास्थल पर उपस्थिति किसी को हत्या का अपराधी बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने हत्या के मामले में आरोपी करन सिंह को दोषमुक्त कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।

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High Court Mere presence at the scene without common intention is not a ground for murder
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि समान इरादे के बिना केवल घटनास्थल पर उपस्थिति किसी को हत्या का अपराधी बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने हत्या के मामले में आरोपी करन सिंह को दोषमुक्त कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।

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रामपुर के टांडा थाने में 1987 में मुख्य अभियुक्त ने दो लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। करन पर आरोप था कि वह घटना के समय मुख्य आरोपी के साथ मौजूद था। उसने हत्या के बाद शवों को छत से नीचे घसीटने में मदद की थी। मामले में ट्रायल कोर्ट ने 1988 में करन को धारा-34 (समान इरादा) के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि करन के पास न तो कोई हथियार था और न ही उसने किसी को उकसाने या हमला करने का काम किया था। चिकित्सा साक्ष्यों में मृतकों के शरीर पर घसीटने के कोई निशान नहीं मिले थे। इससे अभियोजन की कहानी संदिग्ध हो गई। कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया।
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कोर्ट ने कहा-धारा-34 के तहत दोषसिद्धि के लिए पूर्व नियोजित योजना का होना अनिवार्य

कोर्ट ने कहा, धारा-34 के तहत दोषसिद्धि के लिए पूर्व नियोजित योजना का होना अनिवार्य है। इस केस में इसके सबूत नहीं मिले। इन तथ्यों के साथ ही कोर्ट ने करन सिंह की अपील स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया।

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