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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Mandatory to give notice and opportunity for hearing before demolishing construction done

High Court : निजी जमीन पर किए निर्माण को गिराने से पहले नोटिस व सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य

Fri, 24 Apr 2026 02:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 24 Apr 2026 02:50 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी निजी जमीन पर किए गए निर्माण को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।

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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी निजी जमीन पर किए गए निर्माण को गिराने से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने गोपाल कृष्ण व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।

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कोर्ट ने कहा कि विकास प्राधिकरण को मास्टर प्लान के उल्लंघन में किए गए निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। यह मामला प्रयागराज के कर्नलगंज थाना क्षेत्र में प्लॉट संख्या 27 और 28 के सीमा विवाद और उन पर किए गए निर्माण से जुड़ा है।
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राजस्व विभाग की पैमाइश रिपोर्ट के अनुसार प्लॉट संख्या 27 नवीन परती यानी सरकारी भूमि है, जबकि प्लॉट संख्या 28 एक निजी स्वामित्व वाली भूमि है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी संपत्ति पर अवैध रूप से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है।

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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची ने प्लॉट नंबर 27 (नवीन परती) पर निर्माण किया है तो उसे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, बशर्ते कारण बताने के लिए उचित अवसर दिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्लॉट संख्या 27 (सरकारी भूमि) पर किए गए किसी भी अतिक्रमण को कानून के अनुसार हटाया जा सकता है।

वहीं, निजी भूमि (प्लॉट संख्या 28) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांतों का पालन करना होगा। सुनवाई के दौरान प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने कोर्ट को बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई केवल प्लॉट संख्या 28 पर स्थित अशोक कुमार सिंह के उस निर्माण के खिलाफ की गई थी, जो स्वीकृत विकास योजना के अनुरूप नहीं था।

कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए यह भी जोड़ा कि यदि पक्षकारों के बीच कोई निजी विवाद है तो वे सक्षम सिविल कोर्ट में अपनी लड़ाई लड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी निजी निर्माण पर कार्रवाई करने से पहले नोटिस जारी किया जाए।

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