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हाईकोर्ट : किशोर आरोपियों की पहचान का खुलासा करने पर हाईकोर्ट की रोक

Wed, 02 Mar 2022 09:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 02 Mar 2022 09:05 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में आक्षेपित फैसले और आदेश में किशोर की पहचान का खुलासा किया गया है। यह किशोर की निजता और गोपनीयता का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह शिल्पा मित्तल बनाम एनसीटी दिल्ली मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ  है, जिसमें यह माना गया था कि किशोर की पहचान का खुलासा नहीं किया जाएगा।

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High Court: High Court stays on disclosing the identity of juvenile accused
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि किशोर आरोपियों की पहचान को सार्वजनिक न किया जाए। कोर्ट ने अपने रजिस्ट्री विभाग को मौजूदा मामले में किशोर आरोपी की पहचान सभी रिकॉर्डों से हटाने का निर्देश भी दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी ने बागपत के किशोर के पिता की ओर से दाखिल जमानत अर्जी को खारिज करने के खिलाफ दाखिल आपराधिक संशोधन याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में आक्षेपित फैसले और आदेश में किशोर की पहचान का खुलासा किया गया है। यह किशोर की निजता और गोपनीयता का उल्लंघन है। इसके साथ ही यह शिल्पा मित्तल बनाम एनसीटी दिल्ली मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ  है, जिसमें यह माना गया था कि किशोर की पहचान का खुलासा नहीं किया जाएगा।

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पीड़िता की गोली मारकर कर दी गई थी हत्या
मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि पीड़िता कॉलेज परिसर में खड़ी थी। जहां उसे आरोपियों ने पिस्तौल से गोली मार दी। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। यहां किशोर न्याय बोर्ड ने अपीलार्थी को किशोर घोषित किया। क्योंकि, वह घटना के समय सिर्फ 15 वर्ष, छह महीने और 18 दिन का था।



किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 के तहत अपीलार्थी की ओर से दायर जमानत आवेदन को किशोर न्याय बोर्ड ने खारिज कर दिया। अपीलीय कोर्ट ने खारिज करने के आदेश को बरकरार रखा। इसलिए अपीलीय न्यायालय और किशोर न्याय बोर्ड द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ  अपीलार्थी ने मौजूदा याचिका दायर की थी।

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