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High Court : हाईकोर्ट ने समन, वारंट को तामील कराने के लिए नई प्रणाली लागू करने का दिया निर्देश
Sat, 04 Jan 2025 05:13 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 04 Jan 2025 05:13 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने यह अनिवार्य किया कि न्यायिक अधिकारियों को न्यायालय के आदेशों को लागू करने के लिए एसपी, एसएसपी और पुलिस आयुक्तों जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से सीधे संवाद करना चाहिए। साथ ही प्रगति पर हाईकोर्ट को रिपोर्ट देनी चाहिए।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक न्यायालयों की न्यायिक प्रक्रियाओं को सुचारू संचालन के लिए राष्ट्रीय सेवा और ट्रैकिंग इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली (एनएसटीईएस) को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है। यह प्रणाली न्यायालय की ओर से जारी समन, वारंट और कुर्की आदेशों को समय पर तामील कराने के लिए बनाई गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने रामपुर के सचिन की ओर से चेक-बाउंसिंग की मामले को लेकर दाखिल याचिका पर दिया।
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हाईकोर्ट ने यह अनिवार्य किया कि न्यायिक अधिकारियों को न्यायालय के आदेशों को लागू करने के लिए एसपी, एसएसपी और पुलिस आयुक्तों जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से सीधे संवाद करना चाहिए। साथ ही प्रगति पर हाईकोर्ट को रिपोर्ट देनी चाहिए। इस कदम का उद्देश्य उच्च पदस्थ अधिकारियों को न्यायपालिका के निर्देशों की अनदेखी करने से रोकना और जवाबदेह बनाना है। शुरुआत में एनएसटीईएस प्रणाली लखनऊ, गाजियाबाद और मेरठ में लागू की जाएगी। परिणाम अच्छे आने पर इसे पूरे उत्तर प्रदेश के जिलों की आपराधिक अदालतों में विस्तारित किया जाएगा।
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