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High Court : हाईकोर्ट ने फर्जी मुकदमों में फंसाकर रुपये वसूलने के आरोपी अखिलेश दुबे की जमानत अर्जी रद्द

Fri, 31 Oct 2025 04:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 31 Oct 2025 04:04 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और पॉक्सो में फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर रुपये वसूलने के आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जमानत देने से इन्कार कर दिया।

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High Court has rejected the bail application of Akhilesh Dubey, accused of extorting money by
अदालत - फोटो : ANI

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और पॉक्सो में फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर रुपये वसूलने के आरोपी अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जमानत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने दर्ज बयानों की जांच कर निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता से गैरकानूनी तरीके से रुपये वसूलने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज कराने में आरोपी की भूमिका है। अपराध की गंभीरता, जांच में हस्तक्षेप करने और गवाहों को धमकाने की आशंका को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने दिया।

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बर्रा थाने में शिकायतकर्ता रवी सतीजा ने मुकदमा दर्ज कराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिवक्ता अखिलेश दुबे ने उन पर दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराया है और 50 लाख रुपये रंगदारी मांगी है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। ट्रायल कोर्ट से जमानत खारिज होने पर आरोपी ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी को मामले में झूठा फंसाया गया है। सह-अभियुक्त महिलाएं हिरासत में थीं, उनके बयान पुलिस के दबाव में लिए गए थे। आरोपी समाज का एक वृद्ध सम्मानित व्यक्ति है और जिला न्यायालय कानपुर में एक वकील के रूप में प्रैक्टिस कर रहा है। 50 लाख रुपये रंगदारी मांगने का कोई विश्वसनीय सबूत नहीं है। भविष्य में मामले में सुनवाई की संभावना नहीं है। वह छह अगस्त 2025 से जेल में है। इसलिए जमानत दी जानी चाहिए।
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वहीं, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। दलील दी दर्ज बयानों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि दुष्कर्म और पॉक्सो का मुकदमा अखिलेश दुबे के दबाव और धमकी के तहत दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने अपने बयान में कहा कि उसने अखिलेश दुबे को पांच लाख रुपये का भुगतान किया था। अन्य दलीलें दीं। कोर्ट ने कहा कि केस डायरी व अभिलेखों के अवलोकन से ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी निर्दोष लड़कियों व महिलाओं की मदद से मोटी रकम वसूलने के लिए झूठे मुकदमे दर्ज कराने के मामले का केंद्र बिंदु है। आरोपित तथ्यों को जोड़कर देखा जाए तो निष्कर्ष निकलता है कि वह मुख्य आरोपी है। इसी के साथ कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।

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