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High Court : अपहरण मामले में हत्या व साक्ष्य मिटाने के आरोप तय करना वैध, पुनरीक्षण अर्जी खारिज

Thu, 15 Jan 2026 08:07 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 15 Jan 2026 08:07 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों का अवलोकन कर कहा कि प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि अगवा किए गए व्यक्ति की हत्या कर उसके शव को ठिकाने लगाया गया।

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High Court: Framing of charges of murder and destruction of evidence in kidnapping case is valid, revision pet
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच के दौरान एकत्र साक्ष्यों का अवलोकन कर कहा कि प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि अगवा किए गए व्यक्ति की हत्या कर उसके शव को ठिकाने लगाया गया। ऐसे में ट्रायल कोर्ट की ओर से अपहरण के साथ-साथ हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप तय करना पूरी तरह वैध है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने मंगल केशरवानी व तीन अन्य की अर्जी पर दिया है। थरवई थाने में याची के खिलाफ हत्या, अपहरण व साक्ष्य मिटाने के आरोपी में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने मामले में आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। कोर्ट ने इस मामले में हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप भी तय किए। इस फैसले के खिलाफ याची ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण अर्जी दायर की।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कथित घटना की एफआईआर केवल संदेह के आधार पर अपहरण में दर्ज की गई थी। न तो शव की बरामदगी हुई है और न ही हत्या या साक्ष्य मिटाने के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट की ओर से हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप तय करना अधिकार क्षेत्र से परे है।
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वहीं, शिकायतकर्ता और राज्य की ओर से दलील दी गई कि जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट है कि अपहरण किए गए व्यक्ति की हत्या कर शव नदी में फेंक दिया गया था। केवल 90 दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने के कारण अपहरण में चार्जशीट दाखिल की गई। जबकि शव की बरामदगी के लिए जांच अब भी जारी है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद अर्जी खारिज कर दी।
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