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हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी : बीस वर्ष रेस्टोरेशन की अर्जी तय न करना दुर्भाग्यपूर्ण

Thu, 09 Jun 2022 09:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 Jun 2022 09:57 PM IST
सार

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया ने वेद प्रकाश पांडेय की याचिका पर पारित किया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश की प्रति तहसीलदार को एक सप्ताह के अंदर भेजकर सूचित करें।

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High Court expressed displeasure: It is unfortunate that the application for restoration is not fixed for twenty years.
court new - फोटो : istock

विस्तार

नायब तहसीलदार मांडा और तहसील मेजा द्वारा बीस वर्ष से लंबित रेस्टोरेशन की अर्जी को तय न कर पाने को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। कोर्ट ने तहसीलदार से कहा है कि लंबित रेस्टोरेशन की अर्जी को कानून के मुताबिक हर हाल में एक माह के भीतर निस्तारित किया जाए। यही नहीं, कोर्ट ने तहसीलदार के यहां लंबित दाखिल खारिज वाद को, जो वर्ष 1999 से लंबित है, उसे भी शीघ्रातिशीघ्र तीन माह के भीतर तय करने को कहा है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाड़िया ने वेद प्रकाश पांडेय की याचिका पर पारित किया है। कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस आदेश की प्रति तहसीलदार को एक सप्ताह के अंदर भेजकर सूचित करें। याचिका दाखिल कर कहा गया था कि ट्रस्ट की संपत्ति जो वर्ष 1960 में पंजीकृत थी। उसे बगैर ट्रस्ट की जानकारी के रामसुख ने खरीद ली और खतौनी में नाम भी दाखिल खारिज करा लिया। इसको लेकर आपस में विवाद तहसीलदार के यहां लंबित है, जिसका निस्तारण नहीं किया जा रहा है। 

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