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High Court : एक ही कैडर में शामिल कर्मचारियों को अलग-अलग वेतनमान नहीं, यूपी सरकार की अपील खारिज
Fri, 24 Jul 2026 07:21 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 24 Jul 2026 07:21 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के वेतनमान से जुड़े मामले में प्रदेश सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब दो अलग-अलग पदों का विलय कर एक कैडर बना दिया तो पुराने पद के आधार पर कर्मचारियों के बीच अलग-अलग वेतनमान निर्धारित नहीं किया जा सकता।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पशुपालन विभाग के कर्मचारियों के वेतनमान से जुड़े मामले में प्रदेश सरकार की विशेष अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब दो अलग-अलग पदों का विलय कर एक कैडर बना दिया तो पुराने पद के आधार पर कर्मचारियों के बीच अलग-अलग वेतनमान निर्धारित नहीं किया जा सकता।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने दिया है। मामला लाइव स्टॉक डेवलपमेंट असिस्टेंट और लाइव स्टॉक एक्सटेंशन ऑफिसर के पदों के बीच वेतन असमानता से जुड़ा था। दोनों पदों पर कार्यरत कर्मचारियों की योग्यता और कार्य लगभग समान पाए गए थे। सरकार ने दोनों पदों को एक जनवरी 1986 से एकीकृत कैडर में विलय कर दिया था। दो अप्रैल 1992 के शासनादेश के जरिये 1350-2200 रुपये का संशोधित वेतनमान केवल उन कर्मचारियों को दिया गया, जो एक जनवरी 1986 से पहले लाइव स्टॉक एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे। विलय के जरिये उसी कैडर में शामिल कर्मचारियों को 1200-2040 रुपये के वेतनमान में रखा गया। हाईकोर्ट ने इस अंतर को असांविधानिक माना।
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कोर्ट ने कहा विलय के बाद सभी कर्मचारी एकीकृत कैडर के सदस्य बन गए और एक ही पद पर कार्यरत थे। ऐसे में अलग-अलग वेतनमान देना उचित नहीं है। खंडपीठ ने एकल पीठ के जुलाई 2019 के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही आदेश दिया कि संबंधित कर्मचारियों को एक जनवरी 1986 से 1350-2200 रुपये का वेतनमान और सभी परिणामी लाभ दिए जाएं।
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