UP : हाईकोर्ट ने कहा- अनुकंपा नियुक्ति की आड़ में लटकाए नहीं... ड्राइवर कंडक्टर के खाली पद तत्काल भरें
अनुकम्पा नियुक्ति की आड़ में सरकार राज्य परिवहन निगम में ड्राइवर और कंडक्टर के खाली पदों पर भर्ती लटकाएं नहीं। अनुकम्पा नियुक्ति का मकसद मृतक कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना है, रोजगार बांटना नहीं।
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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने अलीगढ़ निवासी निधि शर्मा समेत कई जिलों से जुड़े याचियों की ओर से निर्धारित अवधि के बाद अनुकम्पा नियुक्ति को मांग को लेकर दाखिल कई याचिकाओं को खारिज कर दिया। कहा कि रिक्त पदों पर केवल मृतक आश्रितों की भर्ती करना उन्हें सौ फीसदी आरक्षण देने के समान है, जो समानता के संविधानिक प्रावधान का उल्लंघन है। लिहाजा, निगम तत्काल खाली पदों पर नियमति भर्ती की प्रक्रिया शुरू करें।
मामला परिवहन निगम के मृतक कर्मचारियों के परिजनों से जुड़ा है। याचियों ने परिवहन विभाग में मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी की मांग की थी। विभाग ने यह कहते हुए उनकी मांग ठुकरा दी कि इन्होंने दावा नियम में निर्धारित पांच वर्ष की सीमा के बाद के बाद किया था। इसके खिलाफ याचियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचियों की दलील
याचियों की ओर से दलील दी गई कि याचीगण कर्मचारी के निधन के वक्त या तो नाबालिग थे या फिर निर्धारित योग्यता नहीं पूरी नहीं कर सके थे। बालिग होने के या निर्धारित योग्यता हासिल करने के बाद दावा पेश किया। विभाग में ड्राइवर और कंडक्टर के पद खाली है। फिर भी मृतक आश्रितों को नौकरी देने से इन्कार करना गलत है। हालांकि, कोर्ट ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कहा अनुकम्पा नौकरी रोजगार का जरिया नहीं है।
रिक्त पद वर्षों तक खाली रखना और फिर अनुकम्पा नियुक्ति की आड़ में प्रक्रिया को खींचना कर्मचारियों के साथ अन्याय है: हाईकोर्ट