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हाईकोर्ट: सुनवाई का अवसर दिए बिना बर्खास्तगी प्राकृतिक न्याय के खिलाफ, रोडवेज बस के कंडक्टर की बर्खास्तगी रद्द

Mon, 02 Nov 2026 09:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 02 Nov 2026 09:39 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सुनवाई का प्रभावी अवसर दिए बिना बर्खास्तगी जैसी बड़ी सजा देना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने कानपुर नगर के विकास नगर डिपो में तैनात रहे राजेश दीक्षित की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया।

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High Court: Dismissal without an opportunity for a hearing is contrary to natural justice
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सुनवाई का प्रभावी अवसर दिए बिना बर्खास्तगी जैसी बड़ी सजा देना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने कानपुर नगर के विकास नगर डिपो में तैनात रहे राजेश दीक्षित की बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया।

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याची को एकतरफा सुनवाई के जरिये 29 नवंबर 2025 को बर्खास्त किया गया था। इसके खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कर्मचारी को मौखिक सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। वहीं, निगम के अधिवक्ता ने दलील दी कि सुनवाई का अवसर दिया गया था। इसके बावजूद वह जांच अधिकारी और अनुशासनिक प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।

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कोर्ट ने पाया कि सुनवाई के लिए भेजा गया पंजीकृत डाक का नोटिस लेने से इन्कार की टिप्पणी के साथ वापस आया था। इसके बावजूद प्रभावी सुनवाई और मौखिक जांच कराए बिना बर्खास्तगी का आदेश पारित कर दिया गया। कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर मामले को क्षेत्रीय प्रबंधक के पास नए सिरे से विभागीय कार्यवाही के लिए वापस भेज दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि याची को 16 नवंबर 2026 को क्षेत्रीय प्रबंधक के कार्यालय में उपस्थित होना होगा। उसी दिन उसे आरोपपत्र, संबंधित दस्तावेज और गवाहों की सूची उपलब्ध कराई जाए।

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याची 16 दिसंबर तक अपना जवाब दाखिल करेगा। इसके बाद विभाग को तीन महीने के भीतर उचित सुनवाई का अवसर देते हुए जांच पूरी करने का प्रयास करना होगा। जांच के दौरान याची को निलंबित किया जा सकता है, लेकिन नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देना होगा। निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं होने पर निलंबन आदेश स्वतः निरस्त हो जाएगा। 

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