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High Court : धूमनगंज थाने को अदालत में बदलने के मामले में नाराज कोर्ट ने दो पुलिस निरीक्षकों को तलब किया

Fri, 27 Mar 2026 07:40 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 27 Mar 2026 07:40 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धूमनगंज थाने को दीवानी अदालत में बदलने के मामले में नाराजगी जताते हुए दो पुलिस निरीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने संजय कुमार अग्रवाल और एक अन्य की याचिका पर दिया है।

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High Court: Disgruntled over the conversion of Dhoomanganj police station into a court
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धूमनगंज थाने को दीवानी अदालत में बदलने के मामले में नाराजगी जताते हुए दो पुलिस निरीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने संजय कुमार अग्रवाल और एक अन्य की याचिका पर दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि यह मामला मूलरूप से एक नागरिक विवाद है, जिसमें उधार दिए गए पैसे वापस नहीं किए गए थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में न तो प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है और न ही जांच की जा सकती है।
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कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि धूमनगंज थाना एक सिविल कोर्ट में तब्दील हो गया था, जहां दो तत्कालीन थाना प्रभारियों वैभव सिंह और अमरनाथ राय ने पैसे की वसूली से जुड़े विवाद में हस्तक्षेप किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने इस विवाद के निपटारे के नाम पर शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की। उसके सुरक्षा चेक भी छीन लिए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने दोनों पुलिस अधिकारियों को प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने पुलिस आयुक्त प्रयागराज को निर्देशित किया है कि वे इन दोनों निरीक्षकों की 31 मार्च को दोपहर 2:00 बजे अदालत में व्यक्तिगत उपस्थिति सुनिश्चित करें। साथ ही पुलिस को आदेश दिया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता संजय अग्रवाल और आयुष अग्रवाल को धूमनगंज थाने में दर्ज संबंधित केस में गिरफ्तार न किया जाए। 

26 साल बाद दर्ज एफआईआर में नूतन ठाकुर को अग्रिम जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर के खिलाफ 26 साल पुराने मामले में दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत दे दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिंहा की एकल पीठ ने नूतन ठाकुर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। नूतन ठाकुर के खिलाफ देवरिया के कोतवाली थाने में धोखाधड़ी व जालसाजी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया है।

2025 में दर्ज एफआईआर के अनुसार 1999 में एक औद्योगिक भूखंड के आवंटन में नाम और पति के नाम में कथित हेरफेर की गई। अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि आवंटन के समय नूतन ठाकुर ने अपना नाम नूतन देवी और पति का नाम अजिताभ ठाकुर दर्शाया। जबकि, बाद में भूखंड के हस्तांतरण में सही नामों का प्रयोग किया गया, जिससे धोखाधड़ी का संकेत मिलता है।
वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इमरान उल्ला और विनीत विक्रम ने दलील दी कि घटना 26 साल पुरानी है। इतनी देरी से दर्ज एफआईआर के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। संबंधित संपत्ति का उल्लेख 2001 में उनके पति की ओर से आयकर रिटर्न में किया गया है। एफआईआर दर्ज कराने वाला उनसे द्वेष रखता है। कोर्ट ने नूतन ठाकुर की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। 

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