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इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जिला प्रशासन के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट
Tue, 23 Apr 2019 12:57 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 23 Apr 2019 12:57 AM IST
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hostel allahabad university
- फोटो : प्रयागराज
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीसीबी छात्रावास में पूर्व छात्र रोहित शुक्ला की हत्या के बाद छात्रावास और जिले में कानून-व्यवस्था को लेकर उठाए गए कदमों से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं है। सोमवार को जिलाधिकारी, एसएसपी और विश्वविद्यालय के कुलसचिव हाईकोर्ट में हाजिर हुए। अधिकारियों की ओर से हलफनामा दाखिल कर छात्रावासों से अवैध अंत:वासियों को निकालने के लिए चलाए गए अभियान की जानकारी दी गई। मगर, हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों इसके लिए क्या योजना है। हाईकोर्ट ने इस पर असंतोष जताते हुए अगली तारीख पर बेहतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश कुलसचिव को दिया है। वहीं कोर्ट ने डीएम और एसएसपी की अगली सुनवाई पर उपस्थिति माफ कर दी है।
हत्या की घटना के बाद मुख्य न्यायाधीश ने मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका कायम की है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति न होने के कारण न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति आरआर अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की। अधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि छात्रावासों से आपराधिक तत्वों और अवैध रूप से रह रहे छात्रों को बाहर करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सभी हॉस्टलों में छापा मारकर ऐसे छात्रों को बाहर किया जा रहा है, जो वहां के वैध अंत:वासी नहीं हैं। कई पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
कोर्ट ने शहर और उसके आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। प्रशासन की ओर से इस बारे में कोई ठोस योजना या जानकारी नहीं दी गई। विश्वविद्यालय ने भी ऐसी कोई योजना प्रस्तुत नहीं की जिससे पता चला कि भविष्य में परिसर को अराजक और अपराधी तत्वों से मुक्त रखने की क्या रणनीति होगी। अदालत ने इस पर असंतोष जताते हुए मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों से कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। अगली तारीख 17 मई को कुलसचिव को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
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हत्या की घटना के बाद मुख्य न्यायाधीश ने मामले में स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका कायम की है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति न होने के कारण न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति आरआर अग्रवाल की पीठ ने सुनवाई की। अधिकारियों की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि छात्रावासों से आपराधिक तत्वों और अवैध रूप से रह रहे छात्रों को बाहर करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सभी हॉस्टलों में छापा मारकर ऐसे छात्रों को बाहर किया जा रहा है, जो वहां के वैध अंत:वासी नहीं हैं। कई पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
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कोर्ट ने शहर और उसके आसपास के इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। प्रशासन की ओर से इस बारे में कोई ठोस योजना या जानकारी नहीं दी गई। विश्वविद्यालय ने भी ऐसी कोई योजना प्रस्तुत नहीं की जिससे पता चला कि भविष्य में परिसर को अराजक और अपराधी तत्वों से मुक्त रखने की क्या रणनीति होगी। अदालत ने इस पर असंतोष जताते हुए मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों से कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है। अगली तारीख 17 मई को कुलसचिव को उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
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