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High Court: मुकदमों के निस्तारण में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करें अदालतें

Wed, 08 Dec 2021 11:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 08 Dec 2021 11:37 PM IST
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High Court: Courts should use judicial discretion in disposal of cases
इलाहाबाद हाईकोर्ट
 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि निचली अदालतें वादों के निस्तारण में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करें। वे प्रिटेंट प्रोफार्मा पर आदेश पारित करना बंद कर दें। यह आदेश बुलंदशहर निवासी पवन कुमार की ओर से दाखिल याचिका पर न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी ने दिया है। याचिका फर्जी बैनामे को लेकर जिला न्यायालय में चल रही कार्यवाही को लेकर दायर की गई थी।
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याची का कहना है कि जमीन के बैनामे के मामले में सिविल अदालत में मुकदमा लंबित है। सिविल अदालत ने मामले में स्थायी निषेधाज्ञा पारित कर रखी है। इसके बावजूद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर कार्रवाई शुरू कर दी है। फौजदारी न्यायालय ने भी मामले में न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए बिना याची को प्रिंटेट प्रोफार्मा पर समन भेज दिया।
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याची ने फौजदारी न्यायालय की इस कार्रवाई को समाप्त करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष इसी तरह की शिकायतें प्रदेश के कईऔर जिला न्यायालयाें से मिलीं। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की और प्रदेश के सभी जिला न्यायालयों को आदेश देते हुए कहा है कि वे प्रिटेंट प्रोफार्मे पर कोई आदेश पारित नहीं करेंगी। समन भेजने केलिए अदालतें अपने आदेश को लिखवाकर ही भेजेंगी।
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याची केअधिवक्ता सैयद मोहम्मद अब्बास ने पूर्व में हाईकोर्ट के एक आदेश अंकित अग्रवाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का भी हवाला दिया। इस पर हाईकोर्ट ने निचली अदालतों को आदेश दिया कि समन आदेश पारित करने केदौरान वह न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करते हुए आदेश को लिखवाएं।



कोर्ट ने याची के मामले में जिला न्यायालय बुलंदशहर को फिर से नया समन आदेश भेजने का निर्देश दिया। इस संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट केरजिस्ट्रार से कहा गया है कि वह प्रदेश केसभी जिला न्यायाधीशों, न्यायिक मजिस्ट्रेटों को आदेश की कापी भेजकर इस आदेश का पालन कराना सुनिश्चित करवाएं।
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