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हाईकोर्ट : संविदाकर्मी भी सुनवाई के अवसर का हकदार, सहायक प्रोफेसर की बर्खास्तगी का आदेश रद्द
Sat, 20 Apr 2024 05:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 20 Apr 2024 05:08 PM IST
सार
कोर्ट ने कहा, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत संविदाकर्मी भी सुनवाई के अवसर का हकदार है। कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए संविदा शर्तों के अनुरूप सेवाओं को सवेतन बहाल किया। हालांकि कोर्ट ने विश्वविद्यालय को यह छूट दी कि वह याची को सुनवाई का अवसर देते हुए नए सिरे से आदेश पारित कर सकता है।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संविदा पर तैनात सहायक प्रोफेसर की बर्खास्तगी रद्द कर सेवा बहाली का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की कोर्ट ने छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (कानपुर विश्वविद्यालय) के कृषि विज्ञान विभाग में तैनात सहायक प्रोफेसर डॉ.विकास बाजपेई की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका पर उक्त फैसला सुनाया।
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कोर्ट ने कहा, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत संविदाकर्मी भी सुनवाई के अवसर का हकदार है। कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए संविदा शर्तों के अनुरूप सेवाओं को सवेतन बहाल किया। हालांकि कोर्ट ने विश्वविद्यालय को यह छूट दी कि वह याची को सुनवाई का अवसर देते हुए नए सिरे से आदेश पारित कर सकता है।
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बता दें, याची डॉ.बाजपेई की नियुक्ति संविदा शिक्षक के रूप में विश्वविद्यालय के कृषि विभाग में कृषि विस्तार विषय के सहायक प्रोफेसर के रूप में की गई थी। बिना कारण बताओ नोटिस के विश्वविद्यालय ने इनकी सेवा 20 फरवरी 2024 को समाप्त कर दी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता राम अवतार वर्मा का कहना था कि याची की सेवाएं भले ही संविदा पर थीं, लेकिन विश्वविद्यालय सैद्धांतिक रूप में राज्य का हिस्सा है। राज्य से पारित किसी भी आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत की अवहेलना नहीं की जा सकती है। सुनवाई का अवसर दिए बिना याची की सेवाओं को समाप्त करना असांविधानिक है।
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