हाईकोर्ट की टिप्पणी : हिस्ट्रीशीट देखकर नहीं कह सकते कि कोई अपराध नहीं करेगा, जमानत अर्जी खारिज
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे आपराधिक इतिहास को देख हम यह नहीं मान सकते कि आवेदक भविष्य में जमानत मिलने पर कोई अपराध नहीं करेगा। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंड पीठ ने यह टिप्पणी कर अनुपम शुक्ला उर्फ अनुपमा त्रिपाठी को जमानत देने से इन्कार कर दिया।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर मामले के आरोपी की व उससे जुड़े अन्य सह अभियुक्तों की हिस्ट्रीशीट को देखते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी। कहा कि लंबे आपराधिक इतिहास को देख हम यह नहीं मान सकते कि आवेदक भविष्य में जमानत मिलने पर कोई अपराध नहीं करेगा। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंड पीठ ने यह टिप्पणी कर अनुपम शुक्ला उर्फ अनुपमा त्रिपाठी को जमानत देने से इन्कार कर दिया। प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में दर्ज मुकदमे के आधार पर आवेदक पर गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी।
आवेदक ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की। आवेदक के अधिवक्ता ने दलील दी कि अनुपम को झूठे आरोपों में फंसाया गया है। मुकदमे व्यक्तिगत रंजिश में दर्ज कराए हैं। आवेदक चार सितंबर 2024 से जेल में बंद है। जमानत मिलने पर दुरुपयोग नहीं करेगा। शासकीय अधिवक्ता केके राव व प्रदीप श्रीनेत ने दलील दी कि आरोपी एक संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। गैंगचार्ट में उस पर धमकी देने, जबरन रुपयों की वसूली करने व झूठे मुकदमे दर्ज कराने के मामले शामिल हैं। जमानत मिलने के बाद भी अपराध करना जारी रखा है। इस पर कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।