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High Court : पिता की मृत्यु के 20 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज

Mon, 09 Feb 2026 02:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 09 Feb 2026 02:42 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को तत्काल वित्तीय संकट से उबारना है न कि इसे रोजगार के एक सामान्य स्रोत के रूप में देखा जाना चाहिए।

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High Court Claim for compassionate appointment rejected 20 years after father death
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को तत्काल वित्तीय संकट से उबारना है न कि इसे रोजगार के एक सामान्य स्रोत के रूप में देखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने 20 साल पुराने मामले में देरी के आधार पर अपील खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मोहम्मद दानिश की याचिका पर दिया है।

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संभल निवासी याची के पिता की मृत्यु वर्ष 2005 में हुई थी। उस समय याची की आयु लगभग नौ वर्ष थी। याची ने 2014 में वयस्क होने के बाद 2015-16 और 2019 में सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करने का दावा किया। सुनवाई न होने पर पिता की मृत्यु के 20 साल बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। एकल पीठ ने उसकी याचिका खारिज कर दी। याची ने इस फैसले के खिलाफ विशेष अपील दायर की। खंडपीठ ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मृत्यु के 20 साल बाद भी परिवार में तत्काल वित्तीय तंगी और संकट बना हुआ है, ऐसा नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने विशेष अपील खारिज कर दी। 

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