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High Court : सरकारी प्रक्रिया का हवाला देरी माफी का आधार नहीं, राज्य सरकार की अपील खारिज
Thu, 05 Feb 2026 06:35 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 05 Feb 2026 06:35 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 159 दिन की देरी से दाखिल की गई सरकारी अपील को खारिज कर दिया। कहा कि सरकारी प्रक्रिया का हवाला, देरी को माफ करने का आधार नहीं बन सकता।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 159 दिन की देरी से दाखिल की गई सरकारी अपील को खारिज कर दिया। कहा कि सरकारी प्रक्रिया का हवाला, देरी को माफ करने का आधार नहीं बन सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सलील कुमार राय और न्यायमूर्ति चवन प्रकाश की खंडपीठ ने अवधेश सिंह व अन्य की अपहरण व जालसाजी के मामले से दोषमुक्ति के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दाखिल अपराधिक अपील पर दिया है।
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बरेली की अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 16 अप्रैल 2025 को आरोपियों को बेगुनाह करार दिया था। इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि दोषमुक्ति के आदेश की प्रमाणित प्रतिलिपि 20 मई 2025 को प्राप्त की जा चुकी थी। इस आदेश के खिलाफ 12 जून 2025 को अपील दाखिल करने की संस्तुति की गई। इस पर सरकार ने 22 अगस्त 2025 को अपील दाखिल करने की अनुमति दी। इसके बाद फाइल 26 सितंबर 2025 को एजीए कार्यालय पहुंची और अपील अंततः 12 जनवरी 2026 को दाखिल की गई।
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देरी माफी अर्जी में सरकार की ओर से अपील दाखिल करने में हुई देरी का संतोषजनक और दिन-प्रतिदिन का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। केवल सरकारी प्रक्रिया के आधार पर देरी माफी की मांग की गई। जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
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ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर
खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता के कथन पर अविश्वास जताने में ट्रायल कोर्ट की दृष्टि में कोई अवैधता या विकृति नहीं है। कोर्ट ने यह भी माना कि जिन तथ्यों के आधार पर धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप लगाए गए, वे मूलतः दीवानी प्रकृति के हैं, और बिक्री विलेख निरस्तीकरण के लिए कोई दीवानी वाद भी दाखिल नहीं किया गया। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोर्ट न सरकार की अपील भी खारिज कर दी।