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हाईकोर्ट: यूपीपीसीएस-2021 प्रारंभिक परीक्षा रद्द किए जाने के आदेश को चुनौती, 16 अगस्त को अगली सुनवाई

Wed, 10 Aug 2022 10:54 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 10 Aug 2022 10:54 PM IST
सार

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पीसीएस-2021 की प्रारंभिक परीक्षा के जारी परिणाम को पूर्व सैनिको को पांच फीसदी का लाभ न दिए जाने पर रद्द कर दिया था। इससे आयोग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

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High Court challenging the order of cancellation of UPPCS-2021 preliminary examination
Prayagraj News : यूपीपीएससी। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

यूपीपीसीएस-2021 की भर्ती परीक्षा को रद्द किए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने भर्ती परीक्षा के प्रारंभिक परिणाम को रद्द किए जाने के एकल पीठ के आदेश को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में विशेष अपील दाखिल कर इस आदेश पर रोक लगाते हुए इसे रद्द किए जाने की मांग की है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए 16 अगस्त की तिथि निर्धारित की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ कर रही है।

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हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पीसीएस-2021 की प्रारंभिक परीक्षा केजारी परिणाम को पूर्व सैनिको को पांच फीसदी का लाभ न दिए जाने पर रद्द कर दिया था। इससे आयोग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। आयोग पीसीएस-2021 की प्रांरभिक परीक्षा का परिणाम घोषित कर मुख्य परीक्षा कराने के बाद साक्षात्कार ले रहा था।

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मामले में जूनियर वारंट ऑफिसर सतीश चंद्र शुक्ला व तीन अन्य ने याचिका दाखिल कर पीसीएस-2021 की घोषित प्रारंभिक परीक्षापणिाम को चुनौती दी थी। कहा गया था कि यूपी सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बावजूद पूर्व सैनिको को इस भर्ती परीक्षा में आरक्षण नहीं दिया गया।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सुनवाई कर अपने आदेश में प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को रद्द करते हुए नए सिरे से परिणाम जारी करने का आदेश दिया था। आयोग ने इस आदेश को चुनौती देते हुए विशेष याचिका दाखिल की है।

बुधवार को मामले में कोर्ट के समक्ष मामला पहुंचा तो प्रतिवादियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ता एबीएन त्रिपाठी ने तर्क दिया कि आयोग उन्हें सही तरीके से सूचना नहीं दी। नियम के मुताबिक आयोग को पहले नोटिस देनी चाहिए। आयोग ने जो नोटिस दी वह केवल चार पन्ने की है। जबकि ,खंडपीठ केसामने 186 पेज की याचिका पेश है। यह गलत है। इस पर कोर्ट ने आयोग पर नाराजगी जाहिर की और मामले की सुनवाई को बुधवार को टालते हुए 16 अगस्त की तिथि तय कर दी।

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