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हाईकोर्ट : अदालत के फैसले के विपरीत आदेश देने पर स्वास्थ निदेशक से जवाब तलब

Wed, 24 Nov 2021 07:30 PM IST
विनोद सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 24 Nov 2021 07:30 PM IST
सार

याची का कहना है कि उसके पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। सेवा के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई।याची ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने की अर्जी दी। जिस पर उसे 19अगस्त 96 को नियुक्ति दी गई।

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High Court: Calling for a reply from the Director of Health for giving an order contrary to the court's decision
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद मृतक आश्रित को नियुक्ति नहीं देने के मामले में अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के निदेशक प्रशासन से स्पष्टीकरण तलब किया है। पूछा है कि कोर्ट के आदेश की अवहेलना कर मनमाना आदेश पारित करने पर क्यों न उनकी सेवा पंजिका में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज कराई जाए। देशबुंधु तेजनारायण मिश्र की याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र की पीठ सुनवाई कर रही है। 

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याची का कहना है कि उसके पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। सेवा के दौरान ही उनकी मृत्यु हो गई।याची ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति देने की अर्जी दी। जिस पर उसे 19अगस्त 96 को नियुक्ति दी गई। किन्तु 23मई 98 को नियुक्ति यह कहते हुए रद्द कर दी गई कि नियुक्ति आदेश सक्षम प्राधिकारी ने नहीं दिया था।
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याची ने इस आदेश का हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द करने का आदेश खारिज कर दिया। इसके खिलाफ विभाग की अपील भी खारिज हो गई।  फिर भी याची को कार्यभार ग्रहण नहीं कराया गया।तो फिर से हाईकोर्ट  में याचिका दाखिल की।
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कोर्ट ने नियुक्ति देने का दुबारा निर्देश जारी किया। इसके बाद भी निदेशक ने याची की अर्जी खारिज कर दी। जिसे चुनौती दी गई है। कोर्ट ने कहा कि याची के पिता स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे। सेवाकाल में उनकी मृत्यु हो गई।पुत्र होने के नाते याची को आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने का अधिकार है।इस पर कोई विवाद नहीं है। जब कोर्ट ने नियुक्ति निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया तो यह समझ से परे है कि कोर्ट के फैसले के बावजूद अधिकारी ने कैसे याची के दावे को खारिज कर दिया।

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