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High Court : माह में दो शनिवार कोर्ट खोलने के प्रस्ताव का हाईकोर्ट बार ने किया विरोध, कहा- बढ़ेगा मानसिक दबाव
Sat, 31 Jan 2026 01:37 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 31 Jan 2026 01:37 PM IST
सार
महीने में दो शनिवार को हाईकोर्ट खोलने के प्रस्ताव का इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में बार एसोसिएशन की ओर से अवध बार एसोसिएशन, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच सहित देश भर की हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों को पत्र भेजकर एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया गया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
महीने में दो शनिवार को हाईकोर्ट खोलने के प्रस्ताव का इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। इस संबंध में बार एसोसिएशन की ओर से अवध बार एसोसिएशन, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच सहित देश भर की हाईकोर्ट बार एसोसिएशनों को पत्र भेजकर एकजुट होकर विरोध करने का आह्वान किया गया है। यह पत्र हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राकेश पांडे और महासचिव अखिलेश शर्मा की ओर से जारी किया गया है।
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पत्र में कहा गया है कि यह प्रस्ताव देखने में आकर्षक लग सकता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इससे न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होगी। अधिवक्ताओं, न्यायिक कार्य करने वालों व न्यायालय कर्मचारियों पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ेगा। बार एसोसिएशन का कहना है कि हाईकोर्ट सप्ताह में पहले ही पांच दिन सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक कार्य करता है, जबकि अधिवक्ताओं का कार्य इससे कहीं अधिक समय लेता है।
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सुबह का समय मामलों की तैयारी में और शाम का समय नए मामलों या अगले दिन सूचीबद्ध मामलों को लिखवाने में व्यतीत होता है। पत्र में कहा गया है कि शनिवार और रविवार का उपयोग न्यायाधीश निर्णय लेखन और लंबित आदेशों के निस्तारण के लिए करते हैं। वहीं, न्यायालय कर्मचारियों की भी भारी कमी है, जिसके चलते आदेशों और निर्णयों की प्रतियां पहले से ही विलंब से मिल रही हैं। ऐसे में दो शनिवार कोर्ट खोलना स्थिति को और जटिल करेगा।
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बार एसोसिएशन ने लंबित मामलों के लिए कम कार्य दिवसों को जिम्मेदार ठहराने के तर्क को भ्रामक बताया और कहा कि अनावश्यक सरकारी मुकदमेबाजी, बीमा कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों द्वारा छोटे मामलों को सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाना ही लंबित मामलों का बड़ा कारण है। बार एसोसिएशन ने सभी बार एसोसिएशनों से अपील की है कि वे एकजुट होकर इस प्रस्ताव का विरोध करें। प्रस्ताव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट और विधि मंत्री को ज्ञापन भेजने की भी घोषणा की गई है।