हाईकोर्ट ने पूछा : दुर्घटना मृत्यु का मुकदमा हत्या की धाराओं में कैसे दर्ज कर लिया, विवेचक से मांगा जवाब
मार्ग दुर्घटना की सूचना पुलिस को याची ने ही दी थी। मृतक की पत्नी ने एक तरफ घटना के 17 दिन बाद हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है और दूसरी ओर दुर्घटना मृत्यु दर्शाते हुए बीमा राशि का दावा किया है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए विवेचक को 21 अक्तूबर को हलफनामे के साथ अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुर्घटना के मामले में हत्या की एफआईआर दर्ज करने पर कौंधियारा थाने के विवेचक को जवाबी हलफनामे के साथ तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि उन्होंने दुर्घटना मृत्यु का मुकदमा हत्या की धाराओं में कैसे दर्ज किया है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने याची विकास गुप्ता उर्फ शालू गुप्ता की ओर से दाखिल एफआईआर रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद उक्त आदेश दिए हैं।
बताया गया है कि 13 जुलाई को राजेंद्र प्रताप सिंह मार्ग दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दाैरान 21 जुलाई को उन्होंने दम तोड़ दिया। इसके बाद 31 जुलाई को मृतक की पत्नी किरण सिंह ने याची के खिलाफ हत्या की तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस ने बिना जांच के केस दर्ज कर लिया। इस पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची निर्दोष है।
मार्ग दुर्घटना की सूचना पुलिस को याची ने ही दी थी। मृतक की पत्नी ने एक तरफ घटना के 17 दिन बाद हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है और दूसरी ओर दुर्घटना मृत्यु दर्शाते हुए बीमा राशि का दावा किया है। मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए विवेचक को 21 अक्तूबर को हलफनामे के साथ अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।