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हाईकोर्ट ने पूछा : सीडब्लूसी बताए, किस आधार पर किशोरी को नारी निकेतन भेजा

Sat, 13 Apr 2024 04:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 13 Apr 2024 04:03 PM IST
सार

मामले में कानपुर निवासी महिला पति से अलग अपनी 16 वर्षीय बेटी के साथ रह रही थी। इसी दौरान याची के पति ने गोविंद नगर थाने में बेटी की गुमशुदगी का केस दर्ज कराया। इसके बाद किशोरी को बाल कल्याण गृह कानपुर भेज दिया गया। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

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High Court asked: CWC should tell, on what basis the girl was sent to Nari Niketan
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए बाल कल्याण समिति कानपुर को तलब किया है। कोर्ट ने कहा, शपथ पत्र देकर बताएं कि किस आधार पर किशोरी को नारी निकेतन में भेजा गया। साथ ही थानाध्यक्ष गोविंद नगर को निर्देश दिया है कि किशोरी को महिला पुलिस अधिकारी की हिरासत में कोर्ट में उपस्थित करें। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान व न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायन मिश्रा की कोर्ट ने दिया। याची अधिवक्ता सुनील श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।

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मामले में कानपुर निवासी महिला पति से अलग अपनी 16 वर्षीय बेटी के साथ रह रही थी। इसी दौरान याची के पति ने गोविंद नगर थाने में बेटी की गुमशुदगी का केस दर्ज कराया। इसके बाद किशोरी को बाल कल्याण गृह कानपुर भेज दिया गया। इसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
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याची अधिवक्ता ने कहा कि लड़की की प्राकृतिक अभिभावक मां है। ऐसे में अवैध तरीके से बाल कल्याण समिति के निर्देश पर किशोरी को बाल कल्याण गृह कानपुर में रखा गया है। राज्य के अधिवक्ता ने कहा कि किशोरी अपनी मां की हिरासत में है। इसका पता लगाकर स्थानीय मजिस्ट्रेट ने रिपोर्ट प्रस्तुत की और कार्रवाई की सिफारिश की। पिता का बयान दर्ज होने के बाद बाल कल्याण समिति कानपुर ने किशोरी को नारी निकेतन (सरकारी बाल गृह) में रखने का निर्देश दिया। इस पर कोर्ट ने बाल कल्याण समिति के अधिकृत प्रतिनिधि को तलब किया। साथ ही किशोरी को भी 22 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष पेश करने का आदेश दिया।

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