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डीएम सहारनपुर हाईकोर्ट में तलब
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गवर्नमेंट पीजी कॉलेज देवबंद सहारनपुर के रिटायर्ड प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई का आदेश पारित करने के मामले में जिलाधिकारी सहारनपुर अलोक कुमार पांडेय को तलब कर लिया है। कोर्ट ने डीएम की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताते हुए अगली तारीख 20 फरवरी को हाजिर होने का निर्देश दिया है। साथ ही मंडलायुक्त सहारनपुर को आदेश दिया कि डीएम द्वारा पारित आदेश को सील कर दिया जाए और कोर्ट में नियत तिथि को प्रस्तुत किया जाए।
अशोक कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने दिया है। याचिका पर पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभु राय का कहना था कि डीएम सहारनपुर ने अपनी शक्तियों का बेजा इस्तेमाल कर रिटायर्ड प्रिंसिपल के खिलाफ आदेश पारित किया है, जबकि वह उनके खिलाफ हुई जांच में निर्दोष पाए गए थे और राज्यपाल ने उनको दोषमुक्त किया था। जिलाधिकारी ने राज्यपाल व हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर विपरीत आदेश पारित किया है।
पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने डीएम से स्पष्टीकरण मांगा था। डीएम ने अपने हलफनामे में कहा कि वह याची के खिलाफ की गई कार्रवाई संस्तुति वापस लेने के लिए तैयार हैं। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि इसका अर्थ है कि डीएम दिव्यांग अभ्यर्थी को सेवा योग्य और वेतन भुगतान को लेकर अपने अन्य आदेश को सही मान रहे हैं।
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यह था मामला
मामले के अनुसार 20 नवंबर 2006 को पीजी कॉलेज में चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया। प्रतिपक्ष जो कि दिव्यांग था, उसने भी आवेदन किया। अर्हता न होने के कारण उसकी नियुक्ति नहीं हो सकी तो इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याची ने प्राचार्य के खिलाफ सरकार में भी शिकायत की। उसकी शिकायत पर जांच कमेटी गठित की गई और जांच के बाद राज्यपाल ने प्रिंसिपल को निर्दोष पाया । इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट से अपनी याचिका खुद वापस ले ली थी।
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अशोक कुमार शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी ने दिया है। याचिका पर पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और विभु राय का कहना था कि डीएम सहारनपुर ने अपनी शक्तियों का बेजा इस्तेमाल कर रिटायर्ड प्रिंसिपल के खिलाफ आदेश पारित किया है, जबकि वह उनके खिलाफ हुई जांच में निर्दोष पाए गए थे और राज्यपाल ने उनको दोषमुक्त किया था। जिलाधिकारी ने राज्यपाल व हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना कर विपरीत आदेश पारित किया है।
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पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने डीएम से स्पष्टीकरण मांगा था। डीएम ने अपने हलफनामे में कहा कि वह याची के खिलाफ की गई कार्रवाई संस्तुति वापस लेने के लिए तैयार हैं। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि इसका अर्थ है कि डीएम दिव्यांग अभ्यर्थी को सेवा योग्य और वेतन भुगतान को लेकर अपने अन्य आदेश को सही मान रहे हैं।
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यह था मामला
मामले के अनुसार 20 नवंबर 2006 को पीजी कॉलेज में चतुर्थश्रेणी कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया। प्रतिपक्ष जो कि दिव्यांग था, उसने भी आवेदन किया। अर्हता न होने के कारण उसकी नियुक्ति नहीं हो सकी तो इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याची ने प्राचार्य के खिलाफ सरकार में भी शिकायत की। उसकी शिकायत पर जांच कमेटी गठित की गई और जांच के बाद राज्यपाल ने प्रिंसिपल को निर्दोष पाया । इसके बाद शिकायतकर्ता ने हाईकोर्ट से अपनी याचिका खुद वापस ले ली थी।