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High Court : आईआईटी कानपुर के एक कर्मचारी को सीपीएफ से जीपीएफ में जाने की मिली मंजूरी, दो की याचिका खारिज

Thu, 11 Dec 2025 02:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 11 Dec 2025 02:46 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के तीन पूर्व कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर एक को सीपीएफ से जीपीएफ योजना में जाने की अनुमति दे दी पर दो की मांग खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने दिया है।

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High Court: An IIT Kanpur employee gets approval to switch from CPF to GPF
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के तीन पूर्व कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर एक को सीपीएफ से जीपीएफ योजना में जाने की अनुमति दे दी पर दो की मांग खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने दिया है।

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राम स्वरूप राजपूत (शिक्षक-मैकेनिक बी), फूल सिंह चौहान (इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियर) और एक अन्य शिक्षक ने आईआईटी कानपुर में अपनी सेवाएं दी थीं। उन्होंने सीपीएफ से जीपीएफ पेंशन योजना में जाने के लिए आवेदन किया था, जिसे संस्थान ने 16 सितंबर 2021 के आदेश से खारिज कर दिया तो इस हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
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कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि याची फूल सिंह चौहान ने 31 अगस्त 1990 को सेवा शुरू की थी। यानी केंद्र सरकार के एक मई 1987 के कार्यालय ज्ञापन और आईआईटी की ओर से इसे 11 सितंबर 1987 को अपनाने के बाद वह एक जनवरी 1986 के बाद सेवा में आए। इसलिए उन्हें स्वतः ही पेंशन योजना के अंतर्गत माना जाना चाहिए था। कोर्ट ने राहत देते हुए कहा कि उन्हें आईआईटी की ओर से सीपीएफ में दी गई राशि को पांच प्रतिशत साधारण ब्याज संग वापस करना होगा, जिसके बाद उन्हें जीपीएफ-पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा।
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हालांकि, याची राम स्वरूप राजपूत और तीसरे के संबंध में कोर्ट ने कहा कि उन्होंने 1987 और 1992 में दो बार सीपीएफ योजना में ही रहने का विकल्प चुना था। बाद में 15 वर्ष की सेवा पूरी होने पर भी उन्होंने जीपीएफ में जाने का अवसर नहीं लिया। कोर्ट ने प्रियंका उपाध्याय बनाम भारत संघ तथा प्रो. हरिश्चंद्र चौधरी बनाम भारत संघ के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी संस्थान ने केंद्रीय ओएम को अपनाया है और नया कट-ऑफ दिया है तो उसी के अनुसार विकल्प का प्रयोग किया जाएगा। दो याचियों ने समय रहते सीपीएफ में रहने का विकल्प चुन लिया था, इसलिए अब उन्हें बदलाव की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

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