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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   HIgh Court: Allahabad High Court rejects the petition of Nagari Pracharini Sabha

HIgh Court :नागरी प्रचारिणी सभा के विवादों का पटाक्षेप, कोर्ट ने कहा-शिकायतों को औजार की तरह इस्तेमाल नहीं

Sun, 25 Feb 2024 12:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 25 Feb 2024 12:01 PM IST
सार

मामले में नागरी प्रचारिणी सभा की प्रबंध समिति का विवाद लंबे समय से उप जिला अधिकारी सदर वाराणसी के न्यायालय में चल रहा है। दो प्रबंध समितियां बन गई हैं। दोनों अपने को असली बताती हैं। 2020 में व्योमेश शुक्ला ने इस मुकदमे में पक्षकार बनने के लिए आवेदन किया।

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HIgh Court: Allahabad High Court rejects the petition of Nagari Pracharini Sabha
नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हिंदी की प्राचीनतम संस्थाओं में से एक नागरी प्रचारिणी सभा वाराणसी के विवादों का पटाक्षेप कर दिया है। कोर्ट ने जिला प्रशासन की ओर से कराए गए चुनाव में विजयी व्योमेश शुक्ल के नेतृत्व वाली प्रबंध समिति को मान्यता देते हुए दूसरे पक्ष की याचिका निरस्त कर दी है। कोर्ट ने कहा, नतीजे आने के बाद मुकदमे और शिकायतों को औजार की तरह इस्तेमाल करके निर्णय को टाला नहीं जा सकता।

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न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने आठ पृष्ठों में यह फैसला सुनाया। व्योमेश शुक्ल की ओर से अधिवक्ता कुणाल शाह ने पक्ष रखा, जबकि याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे ने पैरवी की। इस मामले में हिंदी कवि-संस्कृतिकर्मी व्योमेश शुक्ल ने चुनावी जीत हासिल की थी, लेकिन हाईकोर्ट के आदेशों के क्रम में मामले का अंतिम फैसला नहीं आने के कारण संस्था की कमान नहीं सौंपी जा सकी थी। अब अंतिम फैसला आ गया है। इससे लंबे समय से बंद चल रही संस्था में हिंदी प्रेमियों, पाठकों और शोधार्थियों का आना-जाना शुरू होगा। आर्य भाषा पुस्तकालय समेत दूसरे सभी विभाग भी खुल सकेंगे।

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घटनाओं का क्रम :

एसडीएम सदर वाराणसी के न्यायालय में 2015 से नागरी प्रचारिणी सभा की प्रबंध समिति का विवाद चला आ रहा था। हिंदी की इस महान संस्था में दो-दो प्रबंध समितियां बन गई थीं। दोनों खुद को असली बताती थीं।

2020 में व्योमेश शुक्ल ने पक्षकार बनने के लिए आवेदन किया। (28 मार्च 2022 को न्यायालय ने उन्हें पक्षकार मानते हुए दोनों प्रबंध समितियों को फर्जी और विधि शून्य घोषित कर दिया। साथ ही, 2004-2007 की सदस्यता सूची के आधार पर नए चुनाव कराने का आदेश दिया।

एसडीएम सदर वाराणसी के फैसले खिलाफ हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई। कोर्ट ने 29 अप्रैल 2022 को दिए अंतरिम आदेश में चुनाव कराने को कहा। यह भी जोड़ा कि इस मामले में कोर्ट का अंतिम निर्णय आने के बाद ही तय होगा कि संस्था का ‘प्रभावी नियंत्रण’ किसके पास रहे।

9 जून 2022 को राइफल क्लब में जिला प्रशासन ने संस्था के 19 पदों पर चुनाव कराया। मतपत्रों को जिला कोषागार में रखवा दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मतों की गिनती नहीं की गई। 6 अप्रैल, 2023 को दूसरे अंतरिम आदेश से मतगणना हुई, जिसमें व्योमेश शुक्ल प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए और प्रोफेसर अनुराधा बनर्जी सभापति चुनी गईं। मामले का अंतिम फैसला नहीं आने से संस्था के सभी विभागों (आर्य भाषा पुस्तकालय, प्रकाशन, विक्रय आदि) पर ताला ही बंद रहा।

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