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दो जाति प्रमाणपत्र पर नियुक्ति न देना गलत
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिपाही भर्ती के अभ्यर्थी द्वारा दो जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के आधार पर उसका अभ्यर्थन निरस्त करने के पुलिस भर्ती बोर्ड के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने भर्ती बोर्ड से कहा कि याची को एक माह के भीतर ओबीसी कैटेगरी में नियुक्ति दी जाए और यदि ऐसा नहीं करते हैं तो अपर सचिव (नियुक्ति) पुलिस भर्ती बोर्ड 17 मार्च को कोर्ट में हाजिर हों। अभ्यर्थी दृगपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने दिया है।
याची के अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि याची ने अपने ऑनलाइन आवेदन में 16 अगस्त 2015 को जारी ओबीसी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। चयन के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के समय उसने उक्त सर्टिफिकेट के अलावा 18 अप्रैल 2016 को जारी ओबीसी सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत कर दिया। दो जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के आधार पर पुलिस भर्ती बोर्ड ने उसे ओबीसी आरक्षण का लाभ देने से इंकार कर दिया। इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
हाईकोर्ट ने याची के दावे पर माह भर के भीतर विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया था, इसके बाद भी भर्ती बोर्ड ने याची को नियुक्ति नहीं दी तो उसने दोबारा याचिका दाखिल की। कोर्ट ने कहा कि एक और प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर देने से यह नहीं कहा जा सकता कि याची ओबीसी कैटेगरी का नहीं है। कोर्ट ने उसे ओबीसी कैटेगरी का मानते हुए एक माह में नियुक्ति देन पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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याची के अधिवक्ता सुनील यादव का कहना था कि याची ने अपने ऑनलाइन आवेदन में 16 अगस्त 2015 को जारी ओबीसी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। चयन के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के समय उसने उक्त सर्टिफिकेट के अलावा 18 अप्रैल 2016 को जारी ओबीसी सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत कर दिया। दो जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के आधार पर पुलिस भर्ती बोर्ड ने उसे ओबीसी आरक्षण का लाभ देने से इंकार कर दिया। इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई।
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हाईकोर्ट ने याची के दावे पर माह भर के भीतर विचार कर निर्णय लेने का आदेश दिया था, इसके बाद भी भर्ती बोर्ड ने याची को नियुक्ति नहीं दी तो उसने दोबारा याचिका दाखिल की। कोर्ट ने कहा कि एक और प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर देने से यह नहीं कहा जा सकता कि याची ओबीसी कैटेगरी का नहीं है। कोर्ट ने उसे ओबीसी कैटेगरी का मानते हुए एक माह में नियुक्ति देन पर निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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