Heart Attack : संजीवनी से कम नहीं सीपीआर, तुरंत बचाई जा सकती है जान
डॉ. विनय ने बताया कि सीपीआर एक तरह की प्राथमिक चिकित्सा यानी फर्स्ट एड है। जब किसी को सांस लेने में दिक्कत हो या सांस नहीं ले पा रहा हो और बेहोश जो जाए तो सीपीआर से उसकी जान तुरंत बचाई जा सकती है।
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हार्ट अटैक (दिल का दौरा) के बढ़ते मामलों को देखते हुए अमर उजाला द्वारा बुधवार को न्यू कैंट स्थित केंद्रीय विद्यालय में कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान शहर के जाने-माने ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विनय पांडेय ने बच्चों को सिखाया कि अगर किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाए, तो किस तरह से सीपीआर देकर मरीज को चिकित्सीय सुविधा मिलने से पूर्व 60 फीसदी तक बचाया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को चेस्ट पुश व माउथ ब्रीथिंग की जानकारी भी दी।
डॉ. विनय ने बताया कि सीपीआर एक तरह की प्राथमिक चिकित्सा यानी फर्स्ट एड है। जब किसी को सांस लेने में दिक्कत हो या सांस नहीं ले पा रहा हो और बेहोश जो जाए तो सीपीआर से उसकी जान तुरंत बचाई जा सकती है। बिजली का करंट लगने पर, पानी में डूबने पर और दम घुटने पर सीपीआर से तुरंत आराम पहुंचाया जा सकता है।
इससे दिल का दौरा पड़ने पर मरीज की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि दिल का दौरा पड़ने पर पहले एक घंटे को गोल्डन ऑवर माना जाता है। इसी गोल्डन ऑवर में मरीज की जान बचाई जा सकती है। बताया कि कभी-कभी एंबुलेंस या मेडिकल सुविधा किसी कारण उपलब्ध नहीं होती है तो ऐसे समय में सीपीआर संजीवनी का काम करती है।
बच्चों ने पूछे सवाल
1. अविका दीक्षित (कक्षा 11)- हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?
जवाब- ब्लड सप्लाई रुकने की वजह से हार्ट अटैक होता है। कार्डियक अरेस्ट में हार्ट की इलेक्ट्रिक एक्टिविटी खत्म हो जाती है।
2. आस्था (कक्षा 11)- मरीज को सीपीआर कब दिया जाता है?
जवाब- सीपीआर तभी देना है, जब मरीज अचेत अवस्था में हो और उसकी सांस और पल्स नहीं मिल रही है या फिर दोनों नहीं मिल रही है।
3. निमेष पांडेय (कक्षा 11)- कार्डियक अरेस्ट का कारण क्या होता है?
जवाब- इसका सबसे बड़ा कारण हार्ट अटैक और ह्रदय की गति धीमी या तेज होना, शरीर में जहर का पहुंचना, करंट लगना, शरीर में सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम की मात्रा कम या ज्यादा होना सहित कई अन्य कारण हैं।