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UP: HC ने खराब नमकीन के कारोबारियों पर कसा शिकंजा, प्रमुख सचिव खाद्य तलब, केंद्र सरकार को भी किया पक्षकार

Thu, 12 Sep 2024 01:56 PM IST
निकिता गुप्ता अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: निकिता गुप्ता Updated Thu, 12 Sep 2024 01:56 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब नमकीन के कारोबारियों पर कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव खाद्य को तलब किया और केंद्र सरकार को भी इस मामले में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।

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HC tightened screws on dealers of bad salt, Principal Secretary Food Storage, Central Government also sided
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खराब नमकीन के कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है और प्रमुख सचिव खाद्य आपूर्ति से पूछा है कि पशु आहार घोषित कंपनियों की नमकीन को दोबारा पैक करके स्थानीय बाजार में बेचने वाले कारोबारियों के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला और न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की खंडपीठ ने 2020 में बरेली में प्रकाशित अमर उजाला की खबर का स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई के दौरान जारी किया है।

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कोर्ट ने प्रमुख सचिव खाद्य आपूर्ति से हलफनामा मांगते हुए मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को भी इस मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह जन स्वास्थ्य का मुद्दा केवल जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार के खाद्य व आपूर्ति विभाग को भी इस मामले में शामिल करना आवश्यक है।
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सुनवाई के दौरान, कानपुर और बरेली के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और खाद्य आपूर्ति आयुक्त की ओर से 5 सितंबर को एक अनुपालन हलफनामा पेश किया गया, जिसमें इस कारोबार की विस्तृत जानकारी दी गई। हालांकि, कोर्ट ने प्रमुख सचिव खाद्य आपूर्ति को यह स्पष्ट करने का आदेश दिया कि इस खतरनाक कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है। मामले की अगली सुनवाई 20 सितंबर को तय की गई है।
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इस बीच, 21 फरवरी 2020 को बरेली में प्रकाशित अमर उजाला की खबर के संदर्भ में हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज की थी। सरकार को इस पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जवाब न मिलने पर कोर्ट ने सरकार पर जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद मामले की सुनवाई तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने शुरू की थी, और वर्तमान में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक कुमार बिरला की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है। कोर्ट की यह सख्त कार्रवाई जन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है, जो खराब गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित करने में सहायक होगी।

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