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स्नातक में पर्यावरण, अंग्रेजी की पढ़ाई अनिवार्य
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Tue, 14 Apr 2015 12:01 AM IST
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हिन्दी पट्टी के छात्र-छात्राआें और प्रतियोगियों की अंग्रेजी की समस्या कुछ हद तक दूर होने जा रही है। यूजीसी के निर्देशों का पालन हुआ तो आगामी सत्र से स्नातक के विद्यार्थियों को अंग्रेजी की भी पढ़ाई करनी होगी। इतना ही नहीं प्रदूषण के खतरों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में महत्व को देखते हुए पर्यावरण की पढ़ाई भी अनिवार्य कर दी गई है।
यूजीसी ने आगामी सत्र से स्नातक के सभी पाठ्यक्रमों में च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया है। इसके लिए 19 विषयों का सिलेबस और प्रारूप भी जारी कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत स्नातक में सभी छात्र-छात्राओं को पर्यावरण की पढ़ाई करनी होगी। छह महीने के इस कोर्स को पास करना अनिवार्य होगा। स्नातक में पर्यावरण की पढ़ाई करने के लिए यूजीसी तीन वर्षों से प्रयासरत है। ऐसे में अब परीक्षा के नए प्रारूप के लागू होने के बाद इसकी पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।
सिविल सेवा समेत विभिन्न परीक्षाओं के सिलेबस में पर्यावरण को एक टॉपिक के रूप में शामिल कर लिया गया है। ऐसे में इसकी पढ़ाई शुरू होने से छात्र-छात्राओं को इन परीक्षाओं में भी फायदा होगा। इसके अलावा हिन्दी पट्टी के प्रतियोगियों के लिए अंग्रेजी बड़ी चुनौती है। बड़ी संख्या में प्रतियोगी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी की बाधा ही नहीं पार कर पाते। परीक्षाओं के नए प्रारूप तथा प्राइवेट कंपनियों की नौकरी में तो अंग्रेजी का महत्व और बढ़ गया है।
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इसके मद्देनजर छात्र-छात्राओं की मांग पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम में अंग्रेजी की पढ़ाई के लिए अलग से कक्षाओं की लंबे समय से मांग की जा रही है। इसके लिए एकेडमिक काउंसिल से भी अनुमति मिल चुकी है लेकिन अभी पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में यूजीसी की पहल के बाद यहां के विद्यार्थियों को अंग्रेजी की पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। यूजीसी ने स्नातक ऑनर्स के पाठ्यक्रमों में इंग्लिश कम्युनिकेशन की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। इसमें पास भी होना पड़ेगा। आगे इसमें और विस्तार की बात कही जा रही है।
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यूजीसी ने आगामी सत्र से स्नातक के सभी पाठ्यक्रमों में च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया है। इसके लिए 19 विषयों का सिलेबस और प्रारूप भी जारी कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत स्नातक में सभी छात्र-छात्राओं को पर्यावरण की पढ़ाई करनी होगी। छह महीने के इस कोर्स को पास करना अनिवार्य होगा। स्नातक में पर्यावरण की पढ़ाई करने के लिए यूजीसी तीन वर्षों से प्रयासरत है। ऐसे में अब परीक्षा के नए प्रारूप के लागू होने के बाद इसकी पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद की जा रही है।
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सिविल सेवा समेत विभिन्न परीक्षाओं के सिलेबस में पर्यावरण को एक टॉपिक के रूप में शामिल कर लिया गया है। ऐसे में इसकी पढ़ाई शुरू होने से छात्र-छात्राओं को इन परीक्षाओं में भी फायदा होगा। इसके अलावा हिन्दी पट्टी के प्रतियोगियों के लिए अंग्रेजी बड़ी चुनौती है। बड़ी संख्या में प्रतियोगी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी की बाधा ही नहीं पार कर पाते। परीक्षाओं के नए प्रारूप तथा प्राइवेट कंपनियों की नौकरी में तो अंग्रेजी का महत्व और बढ़ गया है।
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इसके मद्देनजर छात्र-छात्राओं की मांग पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम में अंग्रेजी की पढ़ाई के लिए अलग से कक्षाओं की लंबे समय से मांग की जा रही है। इसके लिए एकेडमिक काउंसिल से भी अनुमति मिल चुकी है लेकिन अभी पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में यूजीसी की पहल के बाद यहां के विद्यार्थियों को अंग्रेजी की पढ़ाई शुरू होने की उम्मीद है। यूजीसी ने स्नातक ऑनर्स के पाठ्यक्रमों में इंग्लिश कम्युनिकेशन की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। इसमें पास भी होना पड़ेगा। आगे इसमें और विस्तार की बात कही जा रही है।