High Court :संयुक्त विकास आयुक्त कानपुर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे सरकार, पद के दुरुपयोग पर कोर्ट सख्त
कन्नौज निवासी याचिकाकर्ता के खिलाफ मनरेगा के तहत कुछ मवेशी आश्रय शेड के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच का आदेश दिया गया था। जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कानपुर में तैनात संयुक्त विकास आयुक्त एनबी सविता ने अपने को कानून से ऊपर मानते हुए पद का दुरुपयोग किया है। यह निंदनीय है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायालय ने अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी शराफ व न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने अमिता त्रिपाठी उर्फ नेहा त्रिपाठी की याचिका पर दिया है।
कन्नौज निवासी याचिकाकर्ता के खिलाफ मनरेगा के तहत कुछ मवेशी आश्रय शेड के निर्माण में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच का आदेश दिया गया था। जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। इसके बाद भी बार-बार जांच के आदेश दिए जाने पर इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। न्यायालय ने आठ अगस्त के आदेश से जांच पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद भी जांच के आदेश दिए गए।
न्यायालय ने इसपर सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि संयुक्त विकास आयुक्त ने न्यायालय के आठ अगस्त 2024 के अंतरिम आदेश का उल्लंघन किया है। साथ ही 11 नवंबर 2024 के आदेश के अनुसार अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल नहीं किया।
जब न्यायालय ने व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दिया तब संयुक्त विकास आयुक्त हाजिर हुईं। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि यह दुस्साहस है कि खुद कार्रवाई से बचाने के लिए संयुक्त विकास आयुक्त ने मुख्य स्थायी वकील पर दोष मढ़ने का प्रयास किया है। इस तरह के कदाचार और निंदनीय आचरण को यह न्यायालय बर्दाश्त नहीं कर सकता।
न्यायालय ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को कार्रवाई के लिए आदेश की एक प्रति मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि 16 जनवरी 2025 को स्थायी वकील राज्य सरकार की ओर से की गई कार्रवाई को न्यायालय के समक्ष रखेंगे।