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गूगल बाबा भी नहीं पकड़ सके परीक्षा केंद्रों की गड़बउ़ी
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गूगल बाबा नहीं पकड़ सके केंद्रों के बारे में भेजी गलत जानकारी
विद्यालयों के बीच की दूरी को गूगल की मदद से नहीं पकड़ पाया यूपी बोर्ड का साफ्टवेयर
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। गूगल बाबा भी विद्यालयों की ओर से भरे गए ऑनलाइन विवरण की गड़बड़ी को पकड़ने में कामयाब नहीं हो सका। आरोप है कि बोर्ड और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की रिपोर्ट में हेरफेर करके मानक पूरा नहीं करने वाले स्कूलों को भी परीक्षा केंद्र बना दिया गया। परीक्षा केंद्र बनने से वंचित रह गए विद्यालयों के प्रबंधक अब केंद्र आवंटन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि गलत रिपोर्ट के कारण दो विद्यालयों की दूरी भी गूगल बाबा नहीं पकड़ पा रहा है।
कम संसाधन वाले विद्यालयों को बनाया परीक्षा केंद्र
बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची के बारे में एक प्रधानाचार्य ने टिप्पणी की कि जो काम पहले जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबू और अधिकारी करते थे अब वही काम यूपी बोर्ड के साफ्टवेयर ने कर दिया। उनका कहना था कि अच्छी सुविधाएं होने के बाद भी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के कई वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया। बोर्ड की ओर से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने की होड़ में संसाधन नहीं होने के बाद भी पुराने और जर्जर विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया।
बगल में परीक्षा केंद्र भेज दिया 20 किमी दूर
यूपी बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची में शहर के बीचोबीच स्थित शहर क्षेत्र के कई सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का केंद्र नैनी के वित्तविहीन विद्यालय में बना दिया गया। जिन विद्यालयों का केंद्र नैनी भेजा गया है उनमें इलाहाबाद इंटर कॉलेज, डॉ. केएन काटजू इंटर कॉलेज, डॉ. केपी जायसवाल इंटर कॉलेज एवं मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज शामिल हैं। बोर्ड की ओर से सड़क से हटकर जहां कई विवादित वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है, वहीं सड़क किनारे स्थित काशी प्रसाद सिंह इंटर कॉलेज कठौली जैसे विद्यालय को दो वर्ष से परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है।
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20 गुणे 20 वर्ग फुट का मानक पूरा नहीं
यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा केंद्र बनाने के लिए एक परीक्षार्थी के लिए बैठने के लिए न्यूनतम 20 गुणे 20 वर्ग फुट के मानक को पूरा करने केलिए कहा गया था परंतु बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची में बहुत छोटे कमरे वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया। बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची में परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए तय माना जा रहा है कि एक कमरे में 20 और 25 परीक्षार्थियों के अधिक नहीं होने का मानक पूरा करना संभव नहीं होगा।
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विद्यालयों के बीच की दूरी को गूगल की मदद से नहीं पकड़ पाया यूपी बोर्ड का साफ्टवेयर
प्रयागराज। यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। गूगल बाबा भी विद्यालयों की ओर से भरे गए ऑनलाइन विवरण की गड़बड़ी को पकड़ने में कामयाब नहीं हो सका। आरोप है कि बोर्ड और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के कर्मचारियों एवं अधिकारियों की रिपोर्ट में हेरफेर करके मानक पूरा नहीं करने वाले स्कूलों को भी परीक्षा केंद्र बना दिया गया। परीक्षा केंद्र बनने से वंचित रह गए विद्यालयों के प्रबंधक अब केंद्र आवंटन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि गलत रिपोर्ट के कारण दो विद्यालयों की दूरी भी गूगल बाबा नहीं पकड़ पा रहा है।
कम संसाधन वाले विद्यालयों को बनाया परीक्षा केंद्र
बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची के बारे में एक प्रधानाचार्य ने टिप्पणी की कि जो काम पहले जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबू और अधिकारी करते थे अब वही काम यूपी बोर्ड के साफ्टवेयर ने कर दिया। उनका कहना था कि अच्छी सुविधाएं होने के बाद भी शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र के कई वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया। बोर्ड की ओर से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने की होड़ में संसाधन नहीं होने के बाद भी पुराने और जर्जर विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया।
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बगल में परीक्षा केंद्र भेज दिया 20 किमी दूर
यूपी बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची में शहर के बीचोबीच स्थित शहर क्षेत्र के कई सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का केंद्र नैनी के वित्तविहीन विद्यालय में बना दिया गया। जिन विद्यालयों का केंद्र नैनी भेजा गया है उनमें इलाहाबाद इंटर कॉलेज, डॉ. केएन काटजू इंटर कॉलेज, डॉ. केपी जायसवाल इंटर कॉलेज एवं मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज शामिल हैं। बोर्ड की ओर से सड़क से हटकर जहां कई विवादित वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र बनाने की सिफारिश की गई है, वहीं सड़क किनारे स्थित काशी प्रसाद सिंह इंटर कॉलेज कठौली जैसे विद्यालय को दो वर्ष से परीक्षा केंद्र नहीं बनाया गया है।
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20 गुणे 20 वर्ग फुट का मानक पूरा नहीं
यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा केंद्र बनाने के लिए एक परीक्षार्थी के लिए बैठने के लिए न्यूनतम 20 गुणे 20 वर्ग फुट के मानक को पूरा करने केलिए कहा गया था परंतु बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची में बहुत छोटे कमरे वाले विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया। बोर्ड की ओर से जारी परीक्षा केंद्रों की सूची में परीक्षार्थियों की संख्या को देखते हुए तय माना जा रहा है कि एक कमरे में 20 और 25 परीक्षार्थियों के अधिक नहीं होने का मानक पूरा करना संभव नहीं होगा।