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देश में पहली बार बालिकाओं का ऐसा शिविर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 29 Jan 2018 01:36 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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संगम की रेती पर समुत्कर्षा बालिका शिविर देश में अपनी तरह का पहला आयोजन है, जहां एक साथ 15 हजार बालिकाएं जुटी हैं। इन बालिकाओं को परेड मैदान में बसाए गए अलग-अलग नगरों में ठहराया गया है। उद्घाटन अवसर पर विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री डोमेेश्वर साहू ने विद्या भारती और शिविर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान की शुरूआत 1952 में गोरखपुर से हुई और इसे दुनिया के सबसे बड़े गैर सरकारी शिक्षण संस्थान के रूप में जाना जाता है।
उन्होंने बताया कि विद्या भारती ने विद्यालयों में बालिकाओं की विशेषताओं के हिसाब से बालिका शिक्षा दी जाती है। ताकि वे पारिवारिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से जान और समझ सकें। शिविर की संकल्पना परिवार व्यवस्था के आधार पर है क्योंकि वर्तमान समय में परिवार व्यवस्था टूटती जा रही है। शिविर में एक साथ रहकर बालिकाएं परिवार के महत्व को समझ सकेंगी। इसके पहले स्वागाध्यक्ष महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां समृद्धि होती है। आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और उच्च पदों पर आसीन हैं। बालिकाओं की क्षमता पर संदेह नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। समुत्कर्षा शिविर में हस्तकला, प्रवीणता, कौशल विकास आदि के कार्यक्रम बालिकाओं को आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
समुत्कर्षा बालिका शिविर में मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्या भारती की स्मारिका ‘समुज्जला’ एवं ‘समुत्कर्षा’ का विमोचन किया। स्मारिका समुज्जला कक्षा पांच से आठ तथा समुत्कर्षा कक्षा नौ से 12 तक की छात्राओं के लिए होगी उपयोगी। समुत्कर्षा बालिका शिविर में नेपाल से भी 70 बालिकाएं शामिल हुई हैं। विद्या भारती वहां पशुपति शिक्षा प्रसार समिति के नाम से विद्यालयों का संचालन कर रहा है। कक्षा पांच से 12 तक की यह छात्राएं पहली बार देश के बाहर निकली हैं।
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समुत्कर्षा बालिका शिविर के उद्घाटन अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इसकी शुरूआत सरस्वती शिशु मंदिर गोरखपुर की बालिकाओं ने ‘ऐ धरती पर रहने वालों धरती को स्वर्ग बनाना है’ स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इसके साथ लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर एवं कानपुर की छात्राओं ने ‘हम भविष्य हैं हम हैं भावी भारत की पहचान’ शिविर गीत प्रस्तुत किया। लखनऊ एवं कानपुर की छात्राओं ने वंदेमातरम तो रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसका निर्देशन मनोज गुप्ता ने किया। हारमोनियम पर विनोद द्विवेदी, तबला पर अजय विश्वकर्मा ने संगत की।
समुत्कर्षा बालिका शिविर के उद्घाटन समारोह का संचालन कर रहीं छात्राओं ने हर किसी को अपनी ओर आकर्षित किया। सरस्वती विद्या मंदिर पक्कीबाग गोरखपुर की छात्रा श्रृष्टि सांडिल्य एवं साक्षी पांडेय ने संचालन के दौरान शब्दों का ऐसा चयन किया कि हर किसी की नजर उन पर रही। मुख्यमंत्री ने भी आत्मविश्वास से भी संचालन कर रही दोनों छात्राओं की ताली बजाकर प्रसन्नता की।
समुत्कर्षा बालिका शिविर में शामिल 250 माताएं विभिन्न जिलों से आईं बालिकाओं की देखरेख में लगी है। विभिन्न जिलों के विद्यालयों में गठित मातृ भारती में अभिभावक माताएं शामिल हैं। प्रत्येक नगर में 20-20 माताओं की टोली संरक्षिका आचार्याओं के साथ बालिकाओं को परिवार जैसा माहौल देने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। मातृ भारती की नियमन अखिल भारतीय बालिका शिक्षा प्रमुख रेखा चूड़ास्मा कर रही हैं। शिविर की समय सारिणी का पालन एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन भी पूर्व छात्राओं के साथ मातृ भारती माताएं कर रही हैं। ये माताएं बालिकाओं को होने वाली समस्याओं का निराकरण करने का प्रयास कर रही हैं।
समुत्कर्षा बालिका शिविर में विद्या भारती के विद्यालयों की कक्षा पांच से 12 तक की छात्राएं प्रतिभाग कर रही हैं। इन बालिकाओं की अलग-अलग प्रतियोगिताएं विभिन्न नगरों में हो रही हैं। कक्षा पांच से आठ तक की बालिकाओं को बाल वर्ग, कक्षा नौ से 10 को किशोर वर्ग एवं कक्षा 11 एवं 12 की बालिकाओं को तरुण वर्ग में रखा गया है। बाल वर्ग में स्पाटिंग, अंताक्षरी, एकल गीत प्रतियोगिताएं, किशोर वर्ग में वेस्ट मैटेरियल का उपयोग, पोस्टर निर्माण एवं पेपर कटिंग प्रतियोगिताएं तथा तरुण वर्ग में मंगल कलश सज्जा, वॉल हैगिंग, क्राफ्ट कटिंग आदि विषयों की प्रतियोगिताएं हो रही हैं। रविवार को सभी नगरों में यह प्रतियोगिताएं हुईं। रात में सभी नगरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिसमें बालिकाओं ने नृत्य नाटिका, लोकगीत, सामूहिक नृत्य और समूह गान आदि कार्यक्रम हुए।
आज के कार्यक्रम
दिन में तीन बजे शारीरिक कार्यक्रम
शाम 6 बजे रंगमंचीय कार्यक्रम
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उन्होंने बताया कि विद्या भारती ने विद्यालयों में बालिकाओं की विशेषताओं के हिसाब से बालिका शिक्षा दी जाती है। ताकि वे पारिवारिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से जान और समझ सकें। शिविर की संकल्पना परिवार व्यवस्था के आधार पर है क्योंकि वर्तमान समय में परिवार व्यवस्था टूटती जा रही है। शिविर में एक साथ रहकर बालिकाएं परिवार के महत्व को समझ सकेंगी। इसके पहले स्वागाध्यक्ष महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां समृद्धि होती है। आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और उच्च पदों पर आसीन हैं। बालिकाओं की क्षमता पर संदेह नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। समुत्कर्षा शिविर में हस्तकला, प्रवीणता, कौशल विकास आदि के कार्यक्रम बालिकाओं को आगे बढ़ने में मदद करेंगे।
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समुत्कर्षा बालिका शिविर में मुख्यंमत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्या भारती की स्मारिका ‘समुज्जला’ एवं ‘समुत्कर्षा’ का विमोचन किया। स्मारिका समुज्जला कक्षा पांच से आठ तथा समुत्कर्षा कक्षा नौ से 12 तक की छात्राओं के लिए होगी उपयोगी। समुत्कर्षा बालिका शिविर में नेपाल से भी 70 बालिकाएं शामिल हुई हैं। विद्या भारती वहां पशुपति शिक्षा प्रसार समिति के नाम से विद्यालयों का संचालन कर रहा है। कक्षा पांच से 12 तक की यह छात्राएं पहली बार देश के बाहर निकली हैं।
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समुत्कर्षा बालिका शिविर के उद्घाटन अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इसकी शुरूआत सरस्वती शिशु मंदिर गोरखपुर की बालिकाओं ने ‘ऐ धरती पर रहने वालों धरती को स्वर्ग बनाना है’ स्वागत गीत प्रस्तुत किया। इसके साथ लखनऊ, इलाहाबाद, गोरखपुर एवं कानपुर की छात्राओं ने ‘हम भविष्य हैं हम हैं भावी भारत की पहचान’ शिविर गीत प्रस्तुत किया। लखनऊ एवं कानपुर की छात्राओं ने वंदेमातरम तो रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज राजापुर की छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसका निर्देशन मनोज गुप्ता ने किया। हारमोनियम पर विनोद द्विवेदी, तबला पर अजय विश्वकर्मा ने संगत की।
समुत्कर्षा बालिका शिविर के उद्घाटन समारोह का संचालन कर रहीं छात्राओं ने हर किसी को अपनी ओर आकर्षित किया। सरस्वती विद्या मंदिर पक्कीबाग गोरखपुर की छात्रा श्रृष्टि सांडिल्य एवं साक्षी पांडेय ने संचालन के दौरान शब्दों का ऐसा चयन किया कि हर किसी की नजर उन पर रही। मुख्यमंत्री ने भी आत्मविश्वास से भी संचालन कर रही दोनों छात्राओं की ताली बजाकर प्रसन्नता की।
समुत्कर्षा बालिका शिविर में शामिल 250 माताएं विभिन्न जिलों से आईं बालिकाओं की देखरेख में लगी है। विभिन्न जिलों के विद्यालयों में गठित मातृ भारती में अभिभावक माताएं शामिल हैं। प्रत्येक नगर में 20-20 माताओं की टोली संरक्षिका आचार्याओं के साथ बालिकाओं को परिवार जैसा माहौल देने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। मातृ भारती की नियमन अखिल भारतीय बालिका शिक्षा प्रमुख रेखा चूड़ास्मा कर रही हैं। शिविर की समय सारिणी का पालन एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन भी पूर्व छात्राओं के साथ मातृ भारती माताएं कर रही हैं। ये माताएं बालिकाओं को होने वाली समस्याओं का निराकरण करने का प्रयास कर रही हैं।
समुत्कर्षा बालिका शिविर में विद्या भारती के विद्यालयों की कक्षा पांच से 12 तक की छात्राएं प्रतिभाग कर रही हैं। इन बालिकाओं की अलग-अलग प्रतियोगिताएं विभिन्न नगरों में हो रही हैं। कक्षा पांच से आठ तक की बालिकाओं को बाल वर्ग, कक्षा नौ से 10 को किशोर वर्ग एवं कक्षा 11 एवं 12 की बालिकाओं को तरुण वर्ग में रखा गया है। बाल वर्ग में स्पाटिंग, अंताक्षरी, एकल गीत प्रतियोगिताएं, किशोर वर्ग में वेस्ट मैटेरियल का उपयोग, पोस्टर निर्माण एवं पेपर कटिंग प्रतियोगिताएं तथा तरुण वर्ग में मंगल कलश सज्जा, वॉल हैगिंग, क्राफ्ट कटिंग आदि विषयों की प्रतियोगिताएं हो रही हैं। रविवार को सभी नगरों में यह प्रतियोगिताएं हुईं। रात में सभी नगरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिसमें बालिकाओं ने नृत्य नाटिका, लोकगीत, सामूहिक नृत्य और समूह गान आदि कार्यक्रम हुए।
आज के कार्यक्रम
दिन में तीन बजे शारीरिक कार्यक्रम
शाम 6 बजे रंगमंचीय कार्यक्रम