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नौटंकी विधा को संरक्षण की जरूरत
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 06 Apr 2016 02:02 AM IST
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नाटक
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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संगीत नाटक अकादमी और स्वर्ग रंगमंडल की ओर से मंगलवार को ‘नौटंकी का भविष्य एवं भविष्य की नौटंकी’ विषय पर संगोष्ठी सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित की गई। जिसमें देशभर से जुटे लोक कलाकारों ने नौटंकी के वर्तमान परिदृश्य और भावी रणनीतियों पर विचार साझा किये। सभी ने नौटंकी को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त नौटंकी के वरिष्ठ कलाकारों को लोक नाट्य सम्मान से नवाजा गया। इलाहाबाद, कौशांबी और भदोही के वरिष्ठ नौटंकी कलाकारों को लोकनाट्य शिरोमणि सम्मान प्रदान किया गया।
लोकनाट्यविद अतुल यदुवंशी ने कहा कि नौटंकी के इतर शायद ही ऐसी कोई विधा होगी जो इतनी जीवंत और रसवंत शैली की बराबरी कर सके। उत्तर भारत और मध्य भारत में नौटंकी का जादू जनमानस के सिर चढ़कर बोलता है। लोकनाट्य मर्मज्ञ राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नाट्य के सशक्त प्रवाह की दृष्टि से नौटंकी शैली सर्वश्रेष्ठ है। डॉ. अनुपम आनंद ने कहा कि लोक ही सर्वज्ञ है और नौटंकी ही इस सर्वज्ञता का बोध कराती है। इस दौरान ‘पंच परमेश्वर’ नौटंकी को सभी ने खूब पसंद सराहा। कार्यक्रम का संयोजन धीरज अग्रवाल ने किया।
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लोकनाट्यविद अतुल यदुवंशी ने कहा कि नौटंकी के इतर शायद ही ऐसी कोई विधा होगी जो इतनी जीवंत और रसवंत शैली की बराबरी कर सके। उत्तर भारत और मध्य भारत में नौटंकी का जादू जनमानस के सिर चढ़कर बोलता है। लोकनाट्य मर्मज्ञ राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नाट्य के सशक्त प्रवाह की दृष्टि से नौटंकी शैली सर्वश्रेष्ठ है। डॉ. अनुपम आनंद ने कहा कि लोक ही सर्वज्ञ है और नौटंकी ही इस सर्वज्ञता का बोध कराती है। इस दौरान ‘पंच परमेश्वर’ नौटंकी को सभी ने खूब पसंद सराहा। कार्यक्रम का संयोजन धीरज अग्रवाल ने किया।
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