High Court : शादी में दिए गए उपहारों को आमतौर पर दहेज नहीं माना जाता, मुकदमे की कार्रवाई पर कोर्ट ने लगाई रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी में दिए गए उपहारों को आमतौर पर दहेज नहीं माना जाता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने जबरन धर्म परिवर्तन और दहेज उत्पीड़न के आरोपी परिजनों को राहत दे दी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि शादी में दिए गए उपहारों को आमतौर पर दहेज नहीं माना जाता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने जबरन धर्म परिवर्तन और दहेज उत्पीड़न के आरोपी परिजनों को राहत दे दी। साथ ही कोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी और कहा कि मामले में विस्तृत जांच की आवश्यकता है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की एकलपीठ ने काशिफ अतहर व दो अन्य की याचिका पर दिया। गाजियाबाद निवासी फराज का एक दूसरे धर्म की युवती से प्रेम संबंध था। विवाह के पहले एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। वहीं, इसके कुछ दिनों बाद युवती ने आत्महत्या कर ली। इस पर युवती के पिता ने फराज, उसके भाई काशिफ अतहर, उसकी मां और बहन पर दहेज उत्पीड़न-जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया।
ट्रायल कोर्ट ने पुलिस के आरोप पत्र का संज्ञान लेकर समन आदेश जारी किया। काशिफ अतहर, उसकी मां और बहन ने दर्ज मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए अर्जी दाखिल की। आवेदक के वकील ने दलील दी कि एफआईआर में आवेदकों के खिलाफ केवल इतना आरोप है कि उन्होंने एक होटल में विवाह के पहले समारोह में भाग लिया था। जबरन धर्म परिवर्तन और अन्य आरोप मुख्य रूप से सह-अभियुक्त फराज पर लगाए गए हैं। आवेदकों के खिलाफ एफआईआर में कोई सीधा आरोप नहीं है। 28 दिसंबर 2024 को पुलिस जांच के दौरान मृतका की बहन और मां के बयान में जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास के आरोप लगाए गए। ये आरोप झूठे हैं और आवेदकों को केवल सह-अभियुक्त फराज के रिश्तेदार होने के कारण फंसाया गया है।
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता ने अर्जी का विरोध किया। दलील दी कि विवाह के पहले समारोह में दी गई राशि दहेज के रूप में मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि मामले में विस्तृत जांच की आवश्यकता है। राज्य और शिकायतकर्ता को एक जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। साथ ही अगली सुनवाई 27 अक्तूबर तक आवेदकों के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी। हालांकि, सह-अभियुक्त फराज के संबंध में मुकदमा कानून के अनुसार जारी रह सकता है।