फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Getting a favorable order in a wrong way is like stabbing the bench of the proceedings of the court

हाईकोर्ट ने कहा : गलत तरीके से अनुकूल आदेश प्राप्त करना न्यायालय की कार्यवाही की पीठ में छुरा घोंपने जैसा

Tue, 10 May 2022 02:45 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 10 May 2022 02:45 AM IST
सार

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचियों की ओर से सीआरपीसी की धारा 482 के तहत पहले चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए याचियों को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।

विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गलत तरीके से अनुकूल आदेश प्राप्त करने के प्रयास को न्यायालय की कार्यवाही की पीठ में छुरा घोंपने वाला करार दिया है। कोर्ट ने इसे कदाचार की श्रेणी में माना और याची पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाते हुए अदालतों को इस तरह के अनैतिक वादियों से सावधान रहने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे वादियों पर हर्जाना भी लगाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने गोरखपुर के सनी यादव व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

विज्ञापन



कोर्ट ने याची के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सत्र न्यायालय गोरखपुर को निर्देशित किया कि हर्जाने की राशि रेवेन्यू के रूप रेवेन्यु कलेक्टर गोरखपुर के माध्यम से 31 मई तक जमा कराना सुनिश्चित करेंगे। यदि याची यह रकम जमा नहीं कर पाता है तो उसके खिलाफ वारंट जारी कर कार्रवाई की जाए।
विज्ञापन



मामले में याचियों को गोरखपुर की जिला अदालत द्वारा बरहलगंज थाने में दर्ज रिपोर्ट के मामले में अभियोजन का सामना करने के लिए सीआरपीसी की धारा 319 के तहत बुलाया गया था। याचियों ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि मामले में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि याचियों ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया था। कोर्ट ने इसे देखते हुए पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

 याची के कृत्य को कोर्ट ने निंदनीय और अक्षम्य पाप करार दिया
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचियों की ओर से सीआरपीसी की धारा 482 के तहत पहले चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई करते हुए याचियों को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। याचियों ने कोर्ट का आदेश मानने की बजाय फिर से पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर दी।


कोर्ट ने इसे निदंनीय और अक्षम्य पाप करार दिया। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की प्रथा आजकल न्यायालय में प्रचलित हो गई है। बेईमान वादी किसी भी हद तक जाकर अपने पक्ष में आदेश पाने की कोशिश में लगे रहते हैं। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार का कदाचार न्यायालय की कार्यवाही में पीठ की छुरा घोंपना कहा जा सकता है। कोर्ट ने अदालताें को सावधान रहने की सलाह दी और याचिका को खारिज कर दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed