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गंगा प्रदूषण : शोधन का दावा बेमानी, गंगा में गिर रहा गंदा पानी, गंगा घाटों पर तो स्नान योग्य नहीं रह गया पानी

Fri, 24 May 2024 01:50 PM IST
विनोद सिंह शाश्वत, प्रयागराज
शाश्वत, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 24 May 2024 01:50 PM IST
सार

झूंसी में आठ नालों से गंदा पानी शोधित कर गंगा में गिराने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, हालत यह है कि वहां घाटों पर जल स्नान करने लायक भी नहीं रह गया है। साथ ही रसूलाबाद और दारागंज घाटों पर भी गंगाजल काला होता जा रहा है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नालों से शोधन के बाद ही नालों का पानी गंगा में बहाने का दावा किया है।

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Ganga Pollution: Claim of purification meaningless, dirty water falling into Ganga, water at Ganga Ghats is no
बख्शी बांध स्थित एसटीपी से कुछ इस तरह गंदा पानी सीधे गंगा में छोड़ा जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

नैनी-झूंसी समेत शहर के 44 में से 390 नालों का पानी बायो रेमेडियल ट्रीटमेंट के जरिये गंगा-यमुना में बहाने का दावा हवा-हवाई साबित हो रहा है। प्लांट के बाद भी गंगा में नालों का गंदा पानी गिर रहा है। झूंसी में आठ नालों से गंदा पानी शोधित कर गंगा में गिराने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, हालत यह है कि वहां घाटों पर जल स्नान करने लायक भी नहीं रह गया है। साथ ही रसूलाबाद और दारागंज घाटों पर भी गंगाजल काला होता जा रहा है। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नालों से शोधन के बाद ही नालों का पानी गंगा में बहाने का दावा किया है।

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प्रयागराज में गंगा का जल कई जगहों पर काला होने लगा है। बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा खतरनाक लाइन पर पहुंच गई है। पानी निरंतर कम होने से जल की स्थिति खराब हो रही है। गंगा का बीओडी तीन मिलीग्राम प्रति लीटर के आसपास मिलने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। झूंसी के छतनाग घाट पर गंगा जल स्नान करने लायक नहीं रह गया है। घाट के किनारे रहने वाले लोगों का कहना है कि पानी कम होने के साथ गंगा का रंग बदल रहा है।

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रसूलाबाद व दारागंज घाट पर गंगा जल काला होने लगा है। रसूलाबाद घाट से पहले राजापुुर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगा है। इसी तरह दारागंज घाट पर पर भी ट्रीटमेंट के बाद ही पानी गंगा में गिराया जा रहा है। कमोवेश यही स्थिति झूंसी के छतनाग घाट पर भी है। यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि एसटीपी का पानी जहां भी शोधित होकर गंगा में गिर रहा है, वहीं पर प्रदूषण ज्यादा है। उधर, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों का मानना है कि एसटीपी से नालों को न जोड़े जाने के कारण गंदा पानी सीधे तौर पर गंगा में गिराया जा रहा है।

बोर्ड ने कुछ दिन पहले गंगा और यमुना के जल के नमूनों की जांच की। जांच में झूंसी के पास डाउन स्ट्रीम में गंगा का बीओडी तीन मिलीग्राम प्रति लीटर के आसपास मिला है। संगम पर गंगा का बीओडी 2.8 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला है। यमुना का बीओडी 2.8 मिलीग्राम प्रति लीटर है। गंगा का बीओडी तीन पर होना खतरे की घंटी माना जा रहा है। गंगा का जल निरंतर कम होने से ऐसी स्थिति हुई है। जल और कम होने पर बीओडी की मात्रा और बढ़ सकती है। गंगा की ऐसी स्थिति पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चिंता बढ़ी है। 

महाकुंभ से पहले नालों को किया जाना है बंद
 

सात माह बाद लगने वाले महाकुंभ की परियोजना में गंगा में बढ़ रहे प्रदूषण के बिंदु को भी शामिल किया गया है। इसके तहत महाकुुंभ से पहले गंगा में गिरने वाले सभी नालों को बंद किया जाना है। परियोजना में इस बिंदु को प्रमुखता से रखा गया है। क्योंकि, प्रयागराज में गंगा की निर्मलता को दूषित करने का सबसे बड़ा कारण यही नाले बने हुए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी शासन की मंशा के अनुरूप कार्य में जुटा हुआ है।

गंगा की निगरानी पहले से बढ़ाई गई है। कोशिश हो रही है कि गंगा का बीओडी और न बढ़े। हालांकि,गंगा-यमुना में डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन बेहतर होने से जलीय जीवों को कोई खतरा नहीं है। जांचकर पता लगाया जा रहा है कि गंगा में प्रदूषण कैसे बढ़ रहा है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों की वजह से गंगा में प्रदूषण बढ़ा हुआ दिख रहा है। इसके लिए विशेष तैयारी के साथ कार्य करेंगे। एसटीपी और बायो रेमेडियल विधि से शोधित होने वाले नालों के पानी की भी जांच की जा रही है। - आरके सिंह,क्षेत्रीय अधिकारी उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रयागराज

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बिना शोधित किए यमुना में गिराया जा रहा पानी
 

नैनी। अरैल बांध रोड स्थित पुलिया से नालों का गंदा पानी बिना शोधित किए बिना ही यमुना में गिराया जा रहा है। इससे यमुना-गंगा में जल प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। झाग युक्त और काला पानी सीधे गंगा में मिलने के कारण पास के घाटों पर जल आचमन योग्य नहीं रह गया है। नाले के गंदे पानी को शोधित करने के लिए यहां पर एसटीपी लगा है। एसटीपी तक गंदा पानी पहुंचाने के लिए बांध रोड के बगल से पाइप लाइन बिछाई गई है। पार्षद रणविजय सिंह डब्बू ने बताया कि पानी शोधित करने के लिए एसटीपी लगा है, लेकिन बिना शोधित किए ही, यहां गंदा पानी गंगा में छोड़ दिया जा रहा है। इसे लेकर कई बार सदन में प्रश्न भी उठाया जा चुका है, लेकिन इस समस्या को लेकर अधिकारी मौन हैं। अभी चार माह पहले भी शिकायत पर अपर नगर आयुक्त अरविंद कुमार राय ने मौके का निरीक्षण किया था। 

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