जानिए कौन हैं गणेश केसरवानी : कभी संगठन के लिए बिछाई थी दरी, अब बने प्रयागराज शहर के प्रथम नागरिक
आम कार्यकर्ता के तौर पर वह 1987 में पहली बार भाजपा से जुड़े, यहीं से सियासत का ककहरा सीखना आरंभ किया था। अब उनके महापौर चुने जाने के बाद पार्टी रणनीतिकारों ने यह भी संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा में आम कार्यकर्ता भी बड़े ओहदे तक पहुंच सकता है।
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भाजपा के टिकट पर नगर निगम के महापौर की कुर्सी तक पहुंचने वाले उमेश चंद्र गणेश केसरवानी की छवि पार्टी में जमीनी नेता है। आम कार्यकर्ता के तौर पर वह 1987 में पहली बार भाजपा से जुड़े, यहीं से सियासत का ककहरा सीखना आरंभ किया था। अब उनके महापौर चुने जाने के बाद पार्टी रणनीतिकारों ने यह भी संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा में आम कार्यकर्ता भी बड़े ओहदे तक पहुंच सकता है।
गणेश ने संगठन के लिए दरी भी बिछाई और राम मंदिर आंदोलन में युवाओं के साथ बढ़ चढ़कर भागीदारी भी की। कानपुर विश्वविद्यालय से एमए पास गणेश केसरवानी 1989 में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े। विहिप के साथ जन्मभूमि आंदोलन में संघर्ष के सफर को उन्होंने संगठन की सेवा के रूप में जारी रखा। 52 वर्षीय गणेश ने भाजपा के बूथ अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और वार्ड अध्यक्ष भी बने।
भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में बनाई है पहचान
बाद में मंडल उपाध्यक्ष, मंडल महामंत्री, मंडल संयोजक के साथ ही महानगर मंत्री, महानगर उपाध्यक्ष, महानगर कमेटी में महामंत्री, प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक भी रहे।
इस दौरान लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में संयोजक और चुनाव प्रभारी के रूप में भी दायित्व संभाला। संगठन की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए वह लगातार तन-मन से जुटे रहे। वर्ष 2012 में वह पार्षद चुने गए। सपा सरकार रहने के दौरान में निगम पार्षद के रूप में टैक्स वृद्धि के विरोध में उन्होंने आंदोलन भी किया था।
वर्तमान में भाजपा के महानगर अध्यक्ष हैं गणेश
1993 में दधिकांदो मेला कमेटी के अध्यक्ष और उसके बाद संरक्षक भी चुने गए। मौजूदा समय वह प्रयागराज भाजपा महानगर अध्यक्ष के तौर पर संगठन की कमान संभाल रहे हैं। महापौर पद के लिए जब भाजपा में उन्हें उम्मीदवार बनाया तो पार्टी में बगावत के बीज भी खूब अंकुरित हुए, लेकिन अपनी बेदाग छवि और समर्पण के बल पर वह जनता का दिल जीतने में कामयाब रहे और बड़ी जीत हासिल की।